IAEA के ताजा बयान से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वैश्विक चिंता बढ़ी। एजेंसी ने संवर्धन और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। जानें IAEA की भूमिका, ईरान विवाद और इसका वैश्विक सुरक्षा व ऊर्जा बाजार पर असर।

IAEA (Img Source: Google)
Tehran: ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर हालिया बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी परमाणु निगरानी संस्था IAEA ने अपनी रिपोर्ट में कुछ अहम टिप्पणियां कीं, जिनके बाद कई देशों ने चिंता जताई है। ऐसे में सवाल उठता है कि IAEA क्या है और इसकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
IAEA यानी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी की स्थापना 1957 में हुई थी। इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में है। यह संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसका काम दुनिया भर में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है। सरल शब्दों में कहें तो यह संस्था यह सुनिश्चित करती है कि कोई देश परमाणु तकनीक का इस्तेमाल सैन्य या हथियार बनाने के लिए न करे।
IAEA सदस्य देशों के साथ समझौते के तहत उनके परमाणु संयंत्रों और गतिविधियों की निगरानी करती है। इसके विशेषज्ञ समय-समय पर निरीक्षण करते हैं, सैंपल लेते हैं और तकनीकी विश्लेषण करते हैं।यदि किसी देश की गतिविधियों में संदेहास्पद पहलू सामने आते हैं, तो एजेंसी अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करती है या उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेज सकती है। यही वजह है कि इसकी रिपोर्ट का वैश्विक राजनीति पर सीधा असर पड़ता है।
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ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय रहा है। IAEA समय-समय पर ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण करती रही है। हालिया बयान में एजेंसी ने कुछ गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं, जिससे यह आशंका पैदा हुई है कि परमाणु संवर्धन का स्तर तय सीमा से आगे बढ़ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की भावना के खिलाफ माना जाएगा। यही कारण है कि अमेरिका, यूरोपीय देश और मध्य पूर्व के कई राष्ट्र इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी किसी भी अनिश्चितता का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता। यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिर क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में परमाणु गतिविधियों पर सवाल उठने से संघर्ष की आशंका और बढ़ जाती है।
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IAEA निरीक्षण और रिपोर्टिंग कर सकती है, लेकिन वह सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं करती। उसके पास दंड देने का अधिकार नहीं है। हालांकि, उसकी रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त राष्ट्र या सदस्य देश आगे की कार्रवाई कर सकते हैं। इस तरह IAEA वैश्विक परमाणु सुरक्षा व्यवस्था की एक अहम कड़ी है। उसके बयान और रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़ा महत्व रखते हैं।