कतर में LNG उत्पादन बंद होने से दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? भारत कैसे निपटेगा इस संकट से…

कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक देश है, जो वैश्विक गैस सप्लाई का 20% हिस्सा अकेले देता है। ऐसे में वहां LNG उत्पादन बंद होने से भारत सहित दुनिया के तमाम देश बुरी तरह प्रभावित होंगे। दुनिया को बहुत दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 2 March 2026, 8:21 PM IST

नई दिल्ली: अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई के चलते आज सोमवार को कतर में ऊर्जा सुविधाओं पर ड्रोन हमले हुए। इन हमलों के बाद कतर एनर्जी ने रास लाफान और मेसाइद में तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का उत्पादन रोक दिया है। जानकारों के अनुसार कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक है। ऐसे में उत्पादन बंद होने से भारत सहित दुनिया के तमाम देश बुरी तरह प्रभावित होंगे।

दुनिया के लिए क्या है चुनौती ?

जानकारों के अनुसार कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक देश है, जो वैश्विक गैस सप्लाई का 20% हिस्सा अकेले देता है। वहां उत्पादन बंद होना अच्छी खबर नहीं है। इसके अलावा कतर का सारा गैस निर्यात होर्मुज के रास्ते होता है, लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण युद्ध के कारण रास्ता बाधित होने से कतर और यूएई की गैस सप्लाई में भारी देरी हो रही है।

जानकार मानते हैं कि कतर में एलएनजी (LNG) उत्पादन बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल आ सकता है, क्योंकि यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। इससे यूरोप और एशिया में गैस की कीमतों में भारी उछाल आएगा। आपूर्ति में गंभीर कमी के कारण बिजली संकट और उच्च मुद्रास्फीति का जोखिम पैदा हो सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।

भारत के सामने ये हैं चुनौतियां-

कीमतों में आएगा उछाल

जानकारों के मुताबिक भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। इससे घरेलू बाजार में प्राकृतिक गैस की भारी कमी कीमतों में जबरदस्त उछाल और उर्वरक व बिजली जैसे प्रमुख उद्योगों की उत्पादन लागत में वृद्धि हो सकती है। यह स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती है।

खरीदनी पड़ेगी महंगी गैस

कतर दुनिया के शीर्ष LNG निर्यातकों में से एक है। आपूर्ति रुकने से भारत को अन्य देशों से महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ सकती है। जिससे CNG, PNG और बिजली की कीमतें बढ़ सकती हैं।

उद्योगों पर असर

गैस-आधारित उर्वरक संयंत्र बिजली उत्पादन इकाइयां और MSME क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इन उद्योगों में उत्पादन धीमा या बंद हो सकता हैजिससे माल की कमी और महंगाई बढ़ेगी।

भारत के लिए बड़ी समस्या यह भी है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग प्रभावित होती है, तो भारत के लिए गैस और तेल दोनों का आयात कठिन हो जाएगा।

रुपये पर दबाव

जानकारों का मानना है कि गैस की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ेगा जिससे भारतीय रुपये पर दबाव आ सकता है। भारत को इस संकट से निपटने के लिए अल्पावधि में अमेरिका या अन्य देशों से LNG आयात बढ़ाना होगा या फिर अपने घरेलू गैस उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ानी होगी।

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Published : 
  • 2 March 2026, 8:21 PM IST