अमेरिका और यूरोप में रोमांस से ज्यादा बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देने का ट्रेंड बढ़ रहा है। को-पैरेंटिंग मॉडल में लोग बिना शादी या प्रेम संबंध के मिलकर बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। महामारी के बाद यह चलन तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

को-पैरेंटिंग (Img Source: google)
New York: अमेरिका और यूरोप में जीवनसाथी चुनने का नजरिया तेजी से बदल रहा है। अब कई लोग शादी या रोमांटिक रिश्तों से पहले बच्चों के भविष्य, स्थिरता और साझा जिम्मेदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी सोच से को-पैरेंटिंग यानी बिना प्रेम संबंध या शादी के मिलकर बच्चों की परवरिश करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
लॉस एंजेलिस की 33 वर्षीय रेव रीड इसका उदाहरण हैं। उन्होंने हाल ही में एक अजनबी से डिनर पर मुलाकात की, जहां रोमांस नहीं बल्कि राजनीति, धर्म, बच्चों की शिक्षा और जिम्मेदारियों पर तीन घंटे तक चर्चा हुई। रेव कहती हैं, “मैं केमिस्ट्री नहीं, बल्कि ऐसा साथी चाहती थी जो माता-पिता की भूमिका में टीम की तरह काम करे।” वे 36 की उम्र से पहले मां बनना चाहती हैं और को-पैरेंटिंग को व्यावहारिक विकल्प मानती हैं।
टेक्सास के जैकरी साहुके (34) और अमांडा लोशे (47) एक को-पैरेंटिंग ऐप के जरिए मिले। लंबी बातचीत और आपसी सहमति के बाद दोनों ने आईवीएफ के जरिए दो बेटों को जन्म दिया। वे एक ही फार्म पर अलग-अलग घरों में रहते हैं। बच्चों की देखभाल मां करती हैं और पिता तय समय पर साथ रहते हैं। जैकरी कहते हैं, “बचपन में माता-पिता के झगड़े देखे थे, इसलिए बच्चों को शांत माहौल देना चाहते थे।”
इसी तरह कनाडा के मॉन्ट्रियल में एम्मा बर्थ, फ्लोरेंस और कॉलिन तीनों मिलकर एक बच्चे की परवरिश कर रहे हैं। तीनों एक ही इमारत में अलग-अलग फ्लैट्स में रहते हैं और खर्च व जिम्मेदारियां बराबर बांटी गई हैं। उनका मानना है कि तीन लोगों के बीच फैसले आपसी सहमति से आसान हो जाते हैं।
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कोरोना महामारी के बाद अकेलेपन और अनिश्चितता ने परिवार की अहमियत को नए रूप में सामने रखा। इसी दौरान को-पैरेंटिंग ऐप्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। आंकड़ों के अनुसार, बीते पांच साल में ऐसे प्लेटफॉर्म्स के यूजर्स तीन गुना तक बढ़े हैं।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक स्टडी बताती है कि को-पैरेंटिंग परिवारों में पले-बढ़े बच्चों की मानसिक स्थिति पारंपरिक परिवारों के बच्चों जैसी ही पाई गई है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों के लिए सबसे जरूरी चीज स्थिरता, स्पष्ट संवाद और जिम्मेदार देखभाल है, न कि माता-पिता का वैवाहिक स्टेटस।
हालांकि इस मॉडल की आलोचना भी हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को यह समझाने में मुश्किल हो सकती है कि माता-पिता साथ क्यों नहीं रहते। इसलिए काउंसलिंग, स्पष्ट कानूनी समझौते और लंबे समय की योजना जरूरी है।
फिर भी, बदलते समाज में को-पैरेंटिंग कई लोगों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बनकर उभरा है। यह दिखाता है कि परिवार अब सिर्फ रोमांस या शादी तक सीमित नहीं, बल्कि समझ, साझेदारी और साझा जिम्मेदारी पर भी टिक सकता है।
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