अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध चौथे दिन और भड़क गया, जिससे पूरी दुनिया में दहशत फैल गई। चीन ने दोनों देशों से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की और ईरान की संप्रभुता के समर्थन की बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियार भंडार को लेकर बड़ा दावा करते हुए लंबी लड़ाई के संकेत दिए।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी
New Delhi: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के साथ जो युद्ध शुरू किया है उस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विनाश की तस्वीरें लोगों को भयभीत कर रही हैं। युद्ध के चौथे दिन आज मंगलवार को चीन ने अमेरिका और इजराइल से कहा है कि वे तुरंत सैन्य अभियान को रोकें। चीन का कहना है कि मिडिल ईस्ट में अब और तबाही न हो, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवरों से लगता है कि वे अपने मन की करने के मूड में हैं।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन, ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा करने में उसका समर्थन करता है और उसके वैध अधिकारों और हितों को बनाए रखने में भी उसका समर्थन करता है। चीन ने अमेरिका और इजरायल से सैन्य अभियान तुरंत बंद करने, तनाव को और बढ़ने से रोकने और संघर्ष को पूरे मिडिल ईस्ट में फैलने से रोकने का आग्रह किया।
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एक तरफ जहां चीन लड़ाई रोकने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवरों से लगता है कि वे अपने मन की करने के मूड में हैं। उन्होंने अपने देश के हथियार भंडार को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भंडार के दम पर युद्ध लंबे समय तक और प्रभावी ढंग से लड़े जा सकते हैं।
गौरतलब है कि युद्ध के चलते पूरी दुनिया के लोग दहशत में हैं। इजरायल और अमेरिका के ताबड़तोड़ हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने पलटवार किया तो, मिडिल ईस्ट की आग बेकाबू हो गई। एक ओर इजरायल और अमेरिका ईरान में मिसाइल अटैक कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान भी जमकर पटलवार कर रहा है। ईरान ने इजरायल के अलावा खाड़ी के उन देशों को भी टारगेट किया है, जहां अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं। ईरान की मिसाइलों ने दुबई, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों के आसमान को लाल कर दिया है। दुनिया के लोगों का सबसे बड़ा डर यह है कि युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।