अमेरिका का बड़ा फैसला: रूस और ईरान के तेल पर छूट खत्म, जानिये पूरा अपडेट

अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी गई अस्थायी छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इससे वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ने और कीमतों पर दबाव आने की आशंका है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 16 April 2026, 8:07 AM IST
New Delhi: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला लेते हुए रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी गई अस्थायी छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के देश ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पहले से ही दबाव में हैं।

वित्त मंत्री का बयान

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन अब इन छूटों का नवीनीकरण नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि 11 मार्च से पहले जो तेल जहाजों पर लदा था या ट्रांजिट में था, उसे बेचने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब वह सारा पुराना तेल बाजार में खप चुका है।

30 दिन की अस्थायी राहत

दरअसल, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 12 मार्च को एक अस्थायी 30 दिन की छूट दी थी। इसका उद्देश्य उन देशों, खासकर भारतीय रिफाइनरों को राहत देना था, जिन्होंने पहले ही रूसी तेल खरीद लिया था और वह समुद्र में था। इस फैसले से उन्हें उस तेल को खरीदने और उपयोग करने की अनुमति मिल गई थी।

अमेरिका की रणनीति क्या थी?

बेसेंट ने कहा कि यह छूट रूस को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं थी, बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल पहले से लदे तेल के लिए था और इससे रूस को कोई नया आर्थिक लाभ नहीं मिला।

कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश

फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। ऐसे में अमेरिका ने बाजार को स्थिर करने के लिए यह अस्थायी छूट दी थी, ताकि सप्लाई बाधित न हो और कीमतों में अचानक उछाल न आए।

अब क्या होगा असर?

रूसी तेल पर दी गई छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है, जबकि ईरानी तेल पर छूट 19 अप्रैल को खत्म हो जाएगी। इसके बाद कई देशों के लिए सस्ते तेल के विकल्प सीमित हो सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

भारत समेत कई देशों पर असर

भारत जैसे देश, जो रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद रहे थे, इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से रुख कर सकता है, लेकिन इससे आयात लागत बढ़ सकती है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता

इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। सप्लाई में कमी और भू-राजनीतिक तनाव के चलते आने वाले समय में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  16 April 2026, 8:07 AM IST