
प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों की मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। UP State Employees Protest को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर सभी जनपद शाखाओं और संबद्ध संगठनों को आंदोलन की तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं।
जेएन तिवारी ने कहा कि संयुक्त परिषद की केंद्रीय कार्यकारिणी ने आंदोलन का पोस्टर जारी कर दिया है। सभी जनपद शाखाएं और संबद्ध संगठन इसे प्रिंट कराकर कर्मचारियों को आंदोलन के कार्यक्रमों की जानकारी देंगे। साथ ही सोशल मीडिया के जरिए कर्मचारियों की मांगों को शासन और प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा।
आंदोलन के पहले चरण में 20 नवंबर को प्रदेश के सभी जनपदों में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजा जाएगा।
आंदोलन के दूसरे चरण में 16 दिसंबर को मंडल आयुक्त कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन होगा। परिषद की ओर से इस दौरान भी मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजने की बात कही गई है।
इसके बाद 20 जनवरी को विधानसभा मार्च और विधानसभा के सामने प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया गया है। परिषद के मुताबिक इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जनपदों से 1 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल होंगे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने पुरानी पेंशन की बहाली को प्रमुख मांगों में शामिल किया है। इसके अलावा मानदेय और प्रोत्साहन राशि पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 18,000 रुपये मानदेय देने की मांग की गई है।
परिषद 2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की नियमावली जारी करने, वेतन विसंगतियों का समाधान करने, खाली पदों को भरने और समय से पदोन्नति किए जाने की मांग भी उठा रही है।
जेएन तिवारी ने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव कार्मिक को संयुक्त परिषद की ओर से दर्जनों पत्र भेजे गए, लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी भी कर्मचारी संगठनों के साथ वार्ता कर समस्याओं के निस्तारण में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि करीब दो साल से अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता नहीं हुई है। परिषद का कहना है कि कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है और चुनावी वर्ष में आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
जेएन तिवारी ने कहा कि प्रदेश के करीब 50 लाख कर्मचारी और उनके परिवार इस बार 2027 के चुनाव में कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करेंगे। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारी और उनके परिवार से जुड़ी करीब 2 करोड़ की मतदाता शक्ति की अनदेखी नहीं की जा सकती।
ऑनलाइन बैठक में परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष त्रिलोकी नाथ चौरसिया समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। परिषद ने सभी संगठनों से आंदोलन को सफल बनाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने को कहा है।
Location : Lucknow
Published : 5 October 2026, 10:47 AM IST
Topics : Employee Movement Old Pension Scheme UP government employees UP State Employees Protest Uttar Pradesh Employees