
मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे (IMG: Dynamite News)
Lucknow: शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे पुलिस को करीब दस दिनों तक चकमा देती रही। कभी नेपाल के होटल में ठिकाना बनाया, तो कभी पहचान छिपाकर शहर-दर-शहर सफर किया। मोबाइल से सिम निकाल दिया, अजनबियों के इंटरनेट का इस्तेमाल किया और पुलिस की टीमों के पहुंचने से कुछ घंटे पहले ही ठिकाना बदल लिया। करीब 2,200 किलोमीटर के इस सफर में श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश लगातार पुलिस की पकड़ से दूर रहे। लेकिन नागपुर पहुंचने के लिए बुक की गई कैब के इंटरनेट कनेक्शन ने आखिरकार उसकी फरारी का रास्ता बंद कर दिया।
पुलिस की शुरुआती जांच में मोबाइल नंबर और लोकेशन अहम कड़ी थे, लेकिन श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश ने फरार होने के बाद अपने मोबाइल से सिम कार्ड निकाल दिए। तीनों ने सामान्य कॉल करना भी बंद कर दिया। इससे पुलिस के लिए उनकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो गया। हालांकि, कुछ समय बाद पुलिस को उनके मोबाइल फोन पर इंटरनेट सक्रिय होने के संकेत मिलने लगे। कुछ देर इंटरनेट चलता और फिर बंद हो जाता। पुलिस ने इंटरनेट कनेक्शन और आईपी एड्रेस के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन हर बार जांच एक नए मोड़ पर जाकर अटक जाती थी।
शिवा शर्मा हत्याकांड में घटनाक्रम 9 अक्टूबर की रात से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश के साथ घायल शिवा को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लेकर पहुंची थी। इसके बाद तीनों वहां से निकल गए। परिवार ने श्रद्धा और उसके साथियों पर हत्या का आरोप लगाया था। इसके बावजूद शुरुआती घंटों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि श्रद्धा घटना के कुछ ही समय बाद फरार हो गई और पुलिस को उसकी तलाश शुरू करने में देरी हुई।
श्रद्धा की फरारी का अगला पड़ाव 16 अक्टूबर को सामने आया। जानकारी के मुताबिक, तीनों नेपाल से वापस भारत आए। उन्होंने महराजगंज के भगवानपुर बॉर्डर के पास एक रास्ते से यूपी में प्रवेश किया। पहचान छिपाने के लिए श्रद्धा ने बुर्का पहना और अपने सामान को लेकर भी सावधानी बरती। बताया जाता है कि उसने ट्रॉली बैग एक स्थानीय ड्राइवर को दिया और कपड़े के झोले खरीदे। इसके बाद उसी ड्राइवर की मदद से नौतनवा पहुंची। वहां से किराये की अर्टिगा कार लेकर रायबरेली की तरफ रवाना हो गई।
17 अक्टूबर की सुबह श्रद्धा और उसके साथियों के आगरा पहुंचने की जानकारी सामने आई। यहां तीनों एक होटल में रुके। होटल से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी सामने आने की बात कही गई। इसके बाद 18 अक्टूबर की सुबह श्रद्धा लखनऊ लौटी और विभूतिखंड इलाके में एक न्यूज एजेंसी को बाइट दी। जब उसका बयान मीडिया में प्रसारित हुआ, तो पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। जिस आरोपी की तलाश में टीमें अलग-अलग जगहों पर भटक रही थीं, वह लखनऊ पहुंचकर मीडिया के सामने अपना पक्ष रख रही थी।
मीडिया को बाइट देने के बाद श्रद्धा ने लखनऊ के कमता इलाके से नागपुर जाने के लिए टैक्सी बुक की। बताया जाता है कि पहली अर्टिगा कार की अधिकतम रफ्तार सीमित थी, इसलिए कानपुर पहुंचने के बाद उसने दूसरी अर्टिगा बुक कर ली। इसके बाद सफर फतेहपुर और दूसरे शहरों से होते हुए नागपुर की तरफ बढ़ा। पुलिस को इस दौरान श्रद्धा के मोबाइल पर इंटरनेट सक्रिय होने के संकेत मिले। इस बार कनेक्शन नागपुर ले जाने वाली कैब के चालक के मोबाइल से जुड़ा था।
श्रद्धा दुबे के पीछे कौन? खाकी-खादी से कनेक्शन की चर्चा, मीडिया बाइट से कोर्ट तक पहुंचने की कहानी
नागपुर पहुंचने के बाद कैब चालक आरोपियों को छोड़कर आगे निकल गया। इसी दौरान लखनऊ पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर नागपुर पुलिस ने चालक से संपर्क किया और उससे पूछताछ की। चालक के जरिए पुलिस श्रद्धा के ठिकाने तक पहुंची। इस तरह करीब दस दिनों से फरार चल रही श्रद्धा दुबे को पकड़ने में पुलिस को कामयाबी मिली। जिस कैब के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल कर वह अपनी लोकेशन छिपाने की कोशिश कर रही थी, वही कनेक्शन जांच टीम के लिए अहम सुराग बन गया।
जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, फरारी के दौरान श्रद्धा, रश्मि और दानिश कई जगहों पर ठहरे। पुलिस जिन ठिकानों तक पहुंचती, वहां से आरोपी अक्सर पांच से छह घंटे पहले ही निकल चुके होते थे। ऐसे आठ से दस ठिकानों की जानकारी सामने आई, जहां पुलिस के पहुंचने तक वे गायब हो चुके थे। करीब 2,200 किलोमीटर के इस सफर में तीनों ने कई शहरों और अलग-अलग परिवहन साधनों का इस्तेमाल किया। नेपाल में ठहरने से लेकर यूपी के कई जिलों और फिर नागपुर तक पहुंचने के दौरान उन्होंने अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने की कोशिश की।
Location : Lucknow
Published : 22 October 2026, 11:53 AM IST