Sultanpur Murder Case: 46 साल पुराने हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दो दोषियों की उम्रकैद रद्द; अब आगे क्या होगा?

सुल्तानपुर के 46 साल पुराने सामूहिक हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दो दोषियों सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। घटना के समय दोनों नाबालिग थे। उनकी दोषसिद्धि बरकरार है और सजा पर अब किशोर न्याय बोर्ड फैसला करेगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 October 2026, 12:32 PM IST

Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 46 साल पहले हुए सामूहिक हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने घटना के समय नाबालिग रहे दो दोषियों, सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद, की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। हालांकि, दोनों की दोषसिद्धि बरकरार रखी गई है। अब उनकी सजा पर किशोर न्याय बोर्ड कानून के प्रावधानों के तहत फैसला करेगा।

1980 में पुरानी रंजिश में हुई थीं चार हत्याएं

यह मामला 28 सितंबर 1980 का है। सुल्तानपुर जिले के कुड़वार थाना क्षेत्र के पिपरी गांव में पुरानी रंजिश को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था। इस घटना में शमशद, अब्दुल रफीक, हामिद उल्लाह और दिलशेर की हत्या कर दी गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

सुल्तानपुर की सत्र अदालत ने 14 दिसंबर 1981 को मामले में फैसला सुनाते हुए कई आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई, जो दशकों तक लंबित रही।

घटना के समय नाबालिग होने का दावा

Sultanpur Mass Murder Case की सुनवाई के दौरान सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद की ओर से दावा किया गया कि वारदात के समय उनकी उम्र 18 साल से कम थी। अदालत के निर्देश पर किशोर न्याय बोर्ड ने शैक्षणिक दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रिपोर्ट पेश की।

रिकॉर्ड के अनुसार, घटना के दिन सिराज अहमद की उम्र 17 साल 10 महीने और अब्दुल वाहिद की उम्र 17 साल 11 महीने थी। रिपोर्ट पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों को घटना के समय किशोर माना।

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दोषसिद्धि बरकरार, उम्रकैद की सजा रद्द

जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने अपील संख्या 921/1981 पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत के दोषसिद्धि संबंधी फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई गई। इसलिए दोनों का दोषी ठहराया जाना बरकरार रहेगा।

हालांकि, घटना के समय नाबालिग होने के कारण उनकी वयस्कों वाली सजा रद्द कर दी गई। अदालत ने मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया है, जो कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करेगा।

28 अक्टूबर को बोर्ड के सामने पेश होने का निर्देश

हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों को फैसले की प्रमाणित प्रति के साथ 28 अक्टूबर 2026 को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। बोर्ड को आदेश की प्रति मिलने के छह सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करने को कहा गया है।

सिराज के भाई रियाज अहमद, जो मुकदमे की पैरवी कर रहे थे, ने फैसले पर संतोष जताया। उनका कहना है कि नाबालिग होने का दावा पहले भी किया गया था। अब मामले में आगे की कार्रवाई किशोर न्याय बोर्ड के फैसले पर निर्भर करेगी।

Location :  Sultanpur

Published :  19 October 2026, 11:53 AM IST