बलिया में आखिर कहां गायब हो रहे हैं पक्के मकान, जानिये क्या है पूरा मामला

बलिया में सरयू नदी के विकराल रूप ने गोपालनगर टाड़ी के लोगों की रातों की नींद छीन ली है। एक के बाद एक तीन मकान नदी में समा गए और सैकड़ों ज़िंदगियाँ अब मुहाने पर खड़ी हैं। क्या ग्रामीणों का उग्र धरना और अनशन की चेतावनी प्रशासन को जगा पाएगी या पूरा गांव इतिहास बन जाएगा? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 25 July 2026, 4:27 PM IST

Ballia: बलिया के बैरिया क्षेत्र स्थित गोपालनगर टाड़ी में सरयू नदी की उफनती लहरें मासूम जिंदगियों और उनकी मेहनत की कमाई पर कहर बनकर टूट रही हैं। शुक्रवार शाम को नदी के भीषण कटान के चलते उत्तर टोला निवासी रमेश यादव, शैलेश यादव और मनु यादव के पक्के मकान पलक झपकते ही सरयू के आगोश में समा गए। इतना ही नहीं, रामनाथ, देवनाथ, संतोष और छोटू यादव के घरों से भी नदी की तेज लहरें सीधे टकरा रही हैं, जिससे वे कभी भी नदी में विलीन हो सकते हैं।

इतिहास की कड़वी यादें 

पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदियों का यह तांडव नया नहीं है। पूर्वांचल की नदियां चाहे वह घाघरा हो या सरयू हर साल मानसून में विकराल रूप धारण कर आबादी को निगलती रही हैं। चार साल पहले भी बलिया और आसपास के तटीय इलाकों में हुए भीषण कटान ने सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया था। गोपालनगर टाड़ी के ग्रामीणों की मानें तो पिछले चार सालों के भीतर करीब 375 परिवारों का सब कुछ सरयू नदी लील चुकी है। अतीत की यह तबाही आज फिर गांव के सामने आकर खड़ी हो गई है।

Akhilesh Yadav: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बयान आया सामने, जानिए क्या कहा

अपने हाथों से अपने आशियाने तोड़ने को मजबूर ग्रामीण

गांव में दहशत का माहौल इस कदर हावी है कि लोग अपने खून-पसीने से बनाए घरों को खुद अपने हाथों से हथौड़ों से तोड़ रहे हैं, ताकि ईंट और मलबे को ट्रैक्टरों में लादकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ विभाग केवल प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर रस्म अदायगी कर रहा है, जो बहते पानी में तिनके की तरह बह जा रही है। अगर तुरंत कड़े कटानरोधी उपाय नहीं किए गए तो गांव का मोबाइल टावर और 250 से ज्यादा घर हमेशा के लिए नक्शे से मिट जाएंगे।

Gen Z को बधाई, डर को त्यागकर…. सोनम वांगचुक का धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बड़ा बयान

पीपल के पेड़ के नीचे धरना, आमरण अनशन का अल्टीमेटम

प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित सैकड़ों कटान पीड़ित दूसरे दिन भी गोपालनगर-बशिष्ठ नगर सिवान पर पीपल के पेड़ के नीचे धरने पर डटे रहे। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे, क्योंकि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है।

Location :  Ballia

Published :  25 July 2026, 4:27 PM IST