दो साल तक कैद, सूखी रोटी पर गुजारा और मौत का खौफ… मुजफ्फरनगर की फैक्ट्री के अंदर का सच जानकर दहल जाएंगे आप

मुजफ्फरनगर की एक फैक्ट्री से सामने आई कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। मजदूरी का लालच देकर लाए गए लोगों को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया, उनके दस्तावेज छीन लिए गए और भागने से रोकने के लिए पिटबुल कुत्तों तक का इस्तेमाल किया गया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 June 2026, 12:53 PM IST

Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक ढोना फैक्ट्री में पुलिस की छापेमारी ने कथित बंधुआ मजदूरी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। मंगलवार को एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से निकलकर भागा और पुलिस को सूचना दी कि फैक्ट्री के अंदर कई लोगों को बंधक बनाकर रखा गया है तथा उनसे जबरन काम कराया जा रहा है।

सूचना मिलते ही तितावी पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों, तहसीलदार, सहायक श्रम आयुक्त और अन्य अधिकारियों की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान 12 मजदूरों को मुक्त कराया गया, जिन्हें कथित तौर पर लंबे समय से बंधक बनाकर रखा गया था।

नेपाल समेत कई राज्यों से लाए गए थे मजदूर

मुक्त कराए गए मजदूरों ने पुलिस को बताया कि उन्हें बिहार, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और नेपाल से अच्छी नौकरी और पैसे का लालच देकर यहां लाया गया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। पीड़ितों के अनुसार उन्हें करीब डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया। फैक्ट्री मालिक और उसके सहयोगी उनसे लगातार काम कराते थे। विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज और धमकियां दी जाती थीं।

भागने से रोकने को रखे गए पिटबुल

मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए थे, ताकि वे अपने परिवारों या बाहरी लोगों से संपर्क न कर सकें। इतना ही नहीं, फैक्ट्री परिसर में दो पिटबुल डॉग भी रखे गए थे। मजदूरों का कहना है कि इन कुत्तों के डर से कोई भागने की हिम्मत नहीं कर पाता था। फैक्ट्री के अंदर हर समय भय का माहौल बना रहता था।

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24 घंटे में मिलती थी सूखी रोटी

पीड़ित मजदूरों ने बताया कि उनसे दिन-रात काम कराया जाता था लेकिन बदले में न उचित भोजन दिया जाता था और न ही मजदूरी। कई बार पूरे दिन में केवल सूखी रोटी देकर काम कराया जाता था। बंधकमुक्त मजदूर रामू ने बताया, “मेरा नाम रामू है। मुझे वहां दो महीने 20 दिन हो गए थे। काम कराया गया लेकिन पैसा नहीं मिला। हमें बंधक बनाकर रखा गया था। एसओ साहब और सीओ साहब ने हमें वहां से छुड़ाया। उन्होंने हमें कपड़े दिए, अच्छा खाना दिया और इंसान की तरह रखा। हम जिंदगी भर पुलिस का एहसान नहीं भूलेंगे। बस इतना पैसा मिल जाए कि घर पहुंच सकें, वही बहुत है।”

परिजनों से मिलते ही भावुक हुए मजदूर

बुधवार को मुजफ्फरनगर पुलिस ने मुक्त कराए गए मजदूरों के परिजनों को बुलाकर उनकी मुलाकात कराई। अपने परिवार को देखकर कई मजदूर भावुक हो गए। अब तक चार मजदूरों को उनके परिवारों से मिलवाया जा चुका है। बिहार से दो, राजस्थान से एक और आंध्र प्रदेश से एक परिजन मुजफ्फरनगर पहुंचे। पुलिस की ओर से उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी कराई गई।

भाई की हालत देखकर टूट गया परिवार

राजस्थान के जोधपुर निवासी विक्रम सिंह के भाई ने बताया कि करीब चार महीने पहले उसका भाई घर से निकला था। कुछ दिनों बाद उसका फोन बंद हो गया और परिवार का संपर्क पूरी तरह टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विक्रम हरिद्वार से लापता हुआ था। पुलिस के फोन से ही परिवार को उसके बारे में जानकारी मिली। मुजफ्फरनगर पहुंचकर जब उन्होंने अपने भाई को देखा तो उसकी हालत बेहद खराब थी।

विक्रम के भाई ने कहा, “हम यूपी पुलिस का जितना धन्यवाद करें उतना कम है। अगर पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं करती तो न जाने क्या हो जाता। मेरे भाई ने ही बताया कि अंदर और भी लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें छुड़ाना जरूरी है।”

पूछताछ में सामने आया सनसनीखेज आरोप

मामले की जांच के दौरान मजदूरों ने पुलिस को एक और चौंकाने वाली जानकारी दी। मजदूरों के अनुसार नवंबर 2025 में उनके साथी टोपी उर्फ अर्जुन की कथित तौर पर निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि हत्या के बाद शव को कट्टे में बंद कर फेंक दिया गया था। इस खुलासे के बाद थाना तितावी में मु0अ0सं0 155/2026 के तहत धारा 105 और 238 बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अंकित बालियान की तलाश जारी है।

बंधुआ मजदूरी समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज

पुलिस ने मु0अ0सं0 154/26 में शिवा त्यागी, प्रदीप बालियान और अंकित बालियान के खिलाफ बीएनएस, बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986, किशोर न्याय अधिनियम 2015 तथा बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम 1976 की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार करते थे, उन्हें डराते-धमकाते थे और मारपीट करते थे। शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

चार मजदूरों के कोर्ट में दर्ज हुए बयान

मुक्त कराए गए मजदूरों में रंजीत (मुजफ्फरपुर, बिहार), जगदीश (सीतापुर, उत्तर प्रदेश), साहिल (दयालपुर, हरियाणा) और विक्रम (जोधपुर, राजस्थान) के बयान 24 जून 2026 को 183 बीएनएसएस के तहत अदालत में दर्ज कराए गए हैं। पुलिस ने बताया कि अन्य मजदूरों के बयान भी जल्द दर्ज कराए जाएंगे।

SIT करेगी वैज्ञानिक जांच

मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह टीम सभी तथ्यों और साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करेगी। एसएसपी ने बताया कि सभी 12 मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और मनोचिकित्सकों द्वारा उनकी काउंसलिंग भी कराई जा रही है।

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NGO की मदद से होगा पुनर्वास

पुलिस और प्रशासन ने सहायक श्रम आयुक्त दिनेश से संपर्क कर पुनर्वास प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जा रही है। मजदूरों को पिछले डेढ़ से दो साल की अवधि के लिए अनुदान दिलाने हेतु श्रम विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। जिन मजदूरों के बैंक खाते नहीं हैं, उनके खाते खुलवाए जा रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न एनजीओ की मदद से उन्हें दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अब भी कई परिवारों की तलाश जारी

एसएसपी ने बताया कि छह मजदूरों के परिजनों की पहचान और संपर्क की प्रक्रिया अभी जारी है। वहीं तीन-चार मजदूर ऐसे भी हैं जिनकी पूरी पहचान अभी स्थापित नहीं हो सकी है। पुलिस लगातार उनके परिवारों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

फरार आरोपी की तलाश में दो टीमें गठित

फैक्ट्री संचालक और मामले के वांछित आरोपी अंकित बालियान की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के नेतृत्व में दो विशेष टीमों का गठन किया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  25 June 2026, 12:53 PM IST