मिर्जापुर के राजगढ़ थाने में ऑडियो कांड से हड़कंप! वायरल क्लिप के बाद मुख्य आरक्षी सस्पेंड, अब जांच में किस-किस की गर्दन फंसेगी?

मिर्जापुर के राजगढ़ थाने से जुड़ी कथित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की जांच में मुख्य आरक्षी रणजीत सिंह प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। अब विभागीय जांच में आगे की कार्रवाई पर नजर है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 8 August 2026, 10:23 AM IST

Mirzapur: जिले का राजगढ़ थाना इन दिनों एक वायरल ऑडियो क्लिप को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कथित बातचीत में लेन-देन से जुड़ी बातें सामने आने का दावा किया जा रहा है। मामला पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचने के बाद जांच कराई गई। जांच के शुरुआती निष्कर्ष में एक मुख्य आरक्षी को दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

वायरल ऑडियो ने खड़े किए कई सवाल

राजगढ़ थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी की कथित ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वायरल ऑडियो को लेकर दावा किया गया कि इसमें नशीले पदार्थों के कथित कारोबार और लेन-देन से जुड़ी बातचीत है। हालांकि, ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है।

मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और जांच की प्रक्रिया शुरू की।

जांच में मुख्य आरक्षी पर गिरी गाज

पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच प्रभारी निरीक्षक राजगढ़ से कराई गई। जांच में मुख्य आरक्षी रणजीत सिंह, थाना राजगढ़, मिर्जापुर को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

पुलिस विभाग की ओर से मुख्य आरक्षी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही भी शुरू की गई है। अब विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में उनकी भूमिका किस स्तर तक थी और आगे क्या कार्रवाई होती है।

आखिर क्या होता है 'कारखास'?

वायरल मामले के बाद पुलिस महकमे में इस्तेमाल होने वाले 'कारखास' शब्द को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। आम तौर पर थानों में 'कारखास' किसी सरकारी या निर्धारित पद का नाम नहीं है। बोलचाल में इस शब्द का इस्तेमाल ऐसे पुलिसकर्मी के लिए किया जाता है, जो थाना प्रभारी के करीबी के तौर पर विभिन्न कामों में भूमिका निभाता है।

हालांकि, किसी पुलिसकर्मी को 'कारखास' बताए जाने मात्र से उसके खिलाफ भ्रष्टाचार या अवैध वसूली का आरोप साबित नहीं होता। ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।

एक कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल

इस मामले में एक पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि यदि जांच में अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सामने आती है तो क्या उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी? साथ ही, वायरल ऑडियो में लगाए गए अन्य आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।

विभागीय जांच के नतीजे का इंतजार

मुख्य आरक्षी के निलंबन के बाद विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। अब जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि मामले में आगे कितने लोगों की भूमिका सामने आती है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल वायरल ऑडियो ने पुलिस महकमे में सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

 

Location :  Mirzapur

Published :  8 August 2026, 10:23 AM IST