बागपत के मोहल्ला पठानकोट में निर्माणाधीन मकान का लिंटर गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इसमें 22 वर्षीय वसीम की मौत हो गई, जबकि उसका भाई इमरान घायल हो गया। हादसे में एक मवेशी की भी मौत हुई और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बागपत में दर्दनाक हादसा
Baghpat: जिले के मोहल्ला पठानकोट में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। निर्माणाधीन मकान का लिंटर अचानक गिरने से डेयरी संचालक इशाक के 22 वर्षीय बेटे वसीम की मलबे में दबकर मौत हो गई, जबकि उसका भाई इमरान गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हादसे में मवेशियों को भी नुकसान पहुंचा और एक पशु की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मोहल्ला पठानकोट निवासी इशाक पेशे से डेयरी संचालक हैं। उनके मकान के करीब डेढ़ सौ वर्ग मीटर हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा था। शनिवार दोपहर को मजदूरों द्वारा लिंटर डालने का कार्य किया गया था। लिंटर डालने का काम पूरा होने के बाद अस्थायी सहारे के लिए बल्ली और तख्ते लगाए गए थे।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लिंटर के नीचे ही पशुओं को बांध दिया गया। शाम के समय इशाक का छोटा बेटा वसीम वहां भैंस का दूध निकाल रहा था। उसी दौरान अचानक एक भैंस की टक्कर से लिंटर को सहारा देने वाली बल्ली गिर गई, जिससे तख्ते निकलने लगे।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बल्ली गिरते ही लिंटर असंतुलित हो गया। वसीम खतरे को भांपते हुए वहां से भागने की कोशिश करता, इससे पहले ही पूरा लिंटर भरभराकर नीचे गिर गया। लिंटर के नीचे ही बाहर की तरफ खड़ा उसका भाई इमरान भी इसकी चपेट में आ गया।
लिंटर गिरने से वसीम और इमरान दोनों मलबे के नीचे दब गए। साथ ही वहां बंधे आठ मवेशी भी मलबे में फंस गए। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
जैसे ही लोगों को पता चला कि वसीम और इमरान मलबे के नीचे दबे हैं, पूरा मोहल्ला बचाव में जुट गया। बिना किसी देरी के लोगों ने मलबा हटाना शुरू किया। कुछ लोग फावड़े और तसले लेकर पहुंचे, तो कुछ ने हाथों से ही मलबा हटाने की कोशिश की। दूर रहने वाले लोग भी सूचना मिलते ही दौड़कर मौके पर पहुंचे।
काफी मशक्कत के बाद दोनों भाइयों को मलबे से बाहर निकाला गया और तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने वसीम को मृत घोषित कर दिया। इमरान की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका इलाज जारी है।
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हादसे में मलबे के नीचे दबे आठ मवेशियों में से सात को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि एक पशु की मौके पर ही मौत हो गई। डेयरी संचालक इशाक के लिए यह हादसा दोहरी त्रासदी बन गया, जिसमें एक ओर बेटे की मौत और दूसरी ओर पशुधन की हानि हुई।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ौत कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और यह सुनिश्चित किया कि मलबे के नीचे कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं दबा है। जांच अधिकारी मनोज कुमार चहल ने बताया कि यह हादसा लिंटर गिरने से हुआ है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
इशाक ने बताया कि उनके चार बेटे वसीम, इमरान, इरफान और गुलफाम थे। वसीम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर जरा सा भी अंदेशा होता कि ऐसा हादसा हो सकता है, तो वह वसीम को वहां दूध निकालने नहीं भेजते।