पोर्टल का यह कैसा ‘जादू’? कानपुर में फर्जी कागजों पर मिल रहा हैवी ड्राइविंग लाइसेंस, राज खुला तो उड़ गए अधिकारियों के होश

कानपुर में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के ऑनलाइन नवीनीकरण की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। दावा है कि जरूरी फॉर्म-5ए की जगह कोई दूसरा कागज अपलोड करने पर भी सिस्टम आवेदन को ऑटो-अप्रूव कर रहा है और अब तक 50 से ज्यादा नियमविरुद्ध मामले सामने आ चुके हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 September 2026, 1:58 PM IST

Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण की ऑनलाइन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि पोर्टल पर अनिवार्य दस्तावेजों की जगह साधारण या गलत कागज अपलोड करने के बावजूद आवेदन ऑटो-अप्रूव हो जा रहा है। अप्रूवल के बाद लाइसेंस आवेदक के पते पर भी भेज दिया जा रहा है। अगस्त से अब तक ऐसे 50 से अधिक नियमविरुद्ध मामले अधिकारियों के संज्ञान में आने की बात सामने आई है।

फॉर्म-5ए की जांच के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं

परिवहन विभाग ने लोगों की सुविधा के लिए 52 ऑनलाइन सेवाएं शुरू की हैं, जिनमें हैवी ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण भी शामिल है। नियमों के अनुसार अगस्त से नवीनीकरण के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के साथ प्रशिक्षण संबंधी फॉर्म-5ए भी अनिवार्य किया गया है। आवेदन के दौरान इसे पोर्टल पर अपलोड करना होता है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक सिस्टम में अपलोड किए गए दस्तावेज की वास्तविकता जांचने की प्रभावी व्यवस्था नहीं है।

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गलत दस्तावेज से भी लाइसेंस जारी होने का दावा

बताया जा रहा है कि फॉर्म-5ए के स्थान पर दूसरे कागज अपलोड किए जाने के बावजूद पोर्टल आवेदन को स्वत: मंजूरी दे देता है। इसके बाद ऐसे मामलों का पता चल रहा है, जिनमें जरूरी दस्तावेजों के बजाय गलत प्रपत्र लगाए गए थे। इससे ऑनलाइन प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दलालों के लिए आसान हो रहा रास्ता

इस व्यवस्था का कथित रूप से फायदा दलाल भी उठा रहे हैं। आरोप है कि दो से तीन हजार रुपये लेकर हैवी ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जा रहा है। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण आवेदक को आरटीओ कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती। अधिकारियों ने यह आशंका भी जताई है कि नवीनीकरण से पहले आवेदक और दस्तावेजों का प्रभावी भौतिक सत्यापन नहीं होने पर मृत व्यक्ति के लाइसेंस के नवीनीकरण जैसी गड़बड़ी भी संभव है।

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डॉक्टरों की आईडी से प्रमाण पत्र का मामला

जांच के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात के डॉक्टरों की आईडी से तैयार स्वास्थ्य प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल के मामले भी सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों को आशंका है कि एक ही डॉक्टर की आईडी का इस्तेमाल करके कई स्वास्थ्य प्रमाण पत्र तैयार किए जा सकते हैं। यदि वास्तविक चिकित्सकीय जांच के बिना ऐसे प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, तो इससे ऑनलाइन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

शासन को भेजा गया पत्र

हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के ऑटो-अप्रूवल की व्यवस्था करीब एक महीने से लागू बताई जा रही है। फॉर्म-5ए को अनिवार्य किया गया है, लेकिन जिले स्तर पर इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं होने की बात कही गई है। व्यवस्था में सुधार और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया मजबूत करने के लिए अधिकारियों की ओर से शासन को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

Location :  Kanpur

Published :  22 September 2026, 1:58 PM IST