Delhi GST Scam: 9वीं पास मास्टरमाइंड ने किया 128 करोड़ का खेल! फर्जी कंपनियों के जाल में फंसा सरकारी सिस्टम

दिल्ली में हुए एक बड़े GST घोटाले ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। फर्जी कंपनियों का ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसके जरिए करोड़ों रुपये का खेल खेला गया। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बेहद कम पढ़ा-लिखा बताया जा रहा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 May 2026, 10:23 AM IST

New Delhi: दिल्ली में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने फर्जी कंपनियों का नेटवर्क खड़ा कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सिर्फ एक कंपनी के जरिए 128 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाया गया और करीब 10 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल कर लिया गया।

इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां भी हैरान हैं, क्योंकि आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से फर्जी कंपनियों का पूरा सिंडिकेट तैयार किया था।

50 फर्जी कंपनियों का नेटवर्क आया सामने

पुलिस जांच में अब तक करीब 50 शेल कंपनियों का पता चला है। आशंका जताई जा रही है कि इन कंपनियों के जरिए हजारों करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन किए गए हो सकते हैं। ईओडब्ल्यू की टीम अब इन कंपनियों के बैंक खातों और लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 51.12 लाख रुपये नकद, 15 मोबाइल फोन, कई लैपटॉप, फर्जी जीएसटी बिल, नकली मुहरें और दो लग्जरी कारें बरामद की हैं। अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों से कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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ऐसे चलता था पूरा फर्जीवाड़ा

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पहले फर्जी कंपनियां रजिस्टर कराते थे। इसके बाद बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के नकली बिल तैयार किए जाते थे। बैंकिंग चैनलों के जरिए पैसों का लेनदेन दिखाकर कारोबार को असली साबित किया जाता था।

फिर इन फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिखाकर जीएसटी रिटर्न दाखिल किए जाते थे और इनपुट टैक्स क्रेडिट के नाम पर सरकारी खजाने से मोटी रकम हासिल कर ली जाती थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था।

नौकरी का झांसा देकर तैयार किए जाते थे दस्तावेज

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी बेरोजगार लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे। बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां खड़ी कर दी जाती थीं। पुलिस के अनुसार इस गिरोह का मास्टरमाइंड राजकुमार दीक्षित है, जो सिर्फ नौवीं कक्षा तक पढ़ा हुआ है। बावजूद इसके उसने अब तक 250 से ज्यादा शेल कंपनियां रजिस्टर करा ली थीं। फिलहाल एक कंपनी की जांच में ही 128 करोड़ रुपये के फर्जी कारोबार का खुलासा हुआ है।

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छह आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी राजकुमार दीक्षित, गाजियाबाद निवासी विभाष मित्रा, मथुरा निवासी अमर, दिल्ली के नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद शामिल हैं। वहीं एक अन्य मुख्य आरोपी दिलीप कुमार फिलहाल फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

बढ़ सकती है जांच की सीमा

ईओडब्ल्यू अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं हो सकता। कई राज्यों में फैले नेटवर्क और कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  17 May 2026, 10:23 AM IST