मॉल की लिफ्ट में अचानक बत्ती हुई गुल और कैद हो गईं 13 जिंदगियां; 35 मिनट तक मौत से जंग लड़ते रहे लोग, फिर हुआ ये चमत्कार!

बरेली के सिटी सेंटर एलए मॉल में रविवार रात बिजली गुल होने से 13 लोग 35 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे। बिना ऑपरेटर और खराब अलार्म के चलते अंदर दम घुटने से एक किशोरी बेहोश हो गई। बाहर मौजूद लोगों ने लोहे की रॉड से दरवाजा तोड़कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 June 2026, 4:34 PM IST

Bareilly: उत्तर प्रदेश के बरेली जिला स्थित चौकी चौराहा के पास बने 'सिटी सेंटर एलए मॉल' में रविवार की रात एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने मॉल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया। वीकेंड की छुट्टी मनाने सपरिवार मॉल पहुंचे लोगों के लिए रविवार की रात एक ऐसा खौफनाक दुःस्वप्न बन जाएगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मॉल की लिफ्ट में अचानक आई खराबी के बाद अंदर बंद 13 जिंदगियां 35 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच झूलती रहीं।

बिजली गुल होते ही घुटा दम

रविवार रात को जैसे ही बिजली गुल हुई, तीसरी मंजिल से बेसमेंट की तरफ आ रही लिफ्ट अचानक पहली मंजिल पर अटक गई। भीषण गर्मी और उमस के बीच लिफ्ट में सवार 5 बच्चों और महिलाओं सहित 13 लोगों का दम घुटने लगा। लिफ्ट के भीतर न तो कोई ऑपरेटर मौजूद था और न ही उसका इमरजेंसी अलार्म व कॉल बटन काम कर रहा था। अंदर फंसे लोग घबराहट में चिल्लाने लगे और बाहर सिर्फ 'हेल्प-हेल्प' की आवाजें आने लगीं। घबराहट में जब लोगों ने अंदर से गेट पीटना शुरू किया तो लिफ्ट का सेंसर पूरी तरह लॉक हो गया और जनरेटर चलने के बाद भी गेट नहीं खुला। दम घुटने से लिफ्ट के अंदर ही एक किशोरी बेहोश हो गई, जिससे चीख-पुकार मच गई।

लोहे की रॉड लेकर देवदूत बने लोग

लिफ्ट के भीतर फंसी सुभाषनगर की हरनीत कौर ने रोते हुए आपबीती बताई कि एक पल को लगा कि अब हम जिंदा नहीं बचेंगे। करीब 15 मिनट तक मॉल की तरफ से कोई सुरक्षाकर्मी या रेस्क्यू टीम नहीं पहुंची। इसके बाद मॉल में मौजूद आम लोग (राजेंद्र निगम, जितेंद्र सक्सेना, अमन सिंह और आयुष गंगवार) देवदूत बनकर सामने आए। इन लोगों ने पहले सुरक्षा गार्ड्स को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कोई नहीं मिला। आखिरकार, बाहर मौजूद जनता ने खुद हिम्मत दिखाई और लोहे की रॉड के सहारे लिफ्ट के मजबूत दरवाजे को जबरन तोड़ दिया, जिसके बाद सभी 13 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर पानी पिलाया गया।

मॉल प्रबंधन की दलीलें और लिफ्ट एक्ट की अनिवार्यता

घटना के बाद मॉल के ऑपरेशन मैनेजर विदित कुमार भार्गव ने सफाई दी कि रात के समय लिफ्ट ऑपरेटर तैनात नहीं रहता है। जिस आपातकालीन नंबर पर लोग कॉल कर रहे थे, वह फोन गार्ड छोड़कर मौके पर आ गया था, इसलिए रिसीव नहीं हुआ। हालांकि, इस हादसे में राहत की बात यह रही कि लिफ्ट में 'ऑटो रेस्क्यू डिवाइस' (ARD) लगी हुई थी, जिसके कारण लिफ्ट हवा में न लटककर सीधे फ्लोर पर आकर रुकी। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर अधिनियम के तहत अब सभी कमर्शियल इमारतों में इस डिवाइस को लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

मॉल प्रबंधन को नोटिस और विधिक जांच की तैयारी

इस बड़ी लापरवाही के बाद स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग (Fire Department) मॉल प्रबंधन को नोटिस जारी करने की तैयारी में है। जांच की जा रही है कि मॉल में वेंटिलेशन और आपातकालीन जीवन रक्षक प्रणालियों (Emergency Life Support Systems) का एनओसी (NOC) रिन्यू था या नहीं।

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क्षमता से अधिक लोग सवार होने की आशंका

शुरुआती जांच में यह भी तथ्य सामने आ रहा है कि वीकेंड पर भीड़ अधिक होने के कारण लिफ्ट की निर्धारित क्षमता से ज्यादा लोग उसमें सवार हो गए थे, जिसके कारण बिजली कटते ही लिफ्ट का ओवरलोड सिस्टम ट्रिप हो गया और गेट लॉक हो गया।

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बरेली में लिफ्ट हादसों का पुराना इतिहास

बरेली शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लिफ्ट अटकने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 9 फरवरी को प्रेमनगर के एक रेस्टोरेंट में लिफ्ट फेल होने से 6 बच्चों समेत 10 लोग फंसे थे, जबकि वर्ष 2019 में जिला महिला अस्पताल की लिफ्ट में क्षमता से अधिक 19 लोग फंस गए थे, जिन्हें 2 घंटे बाद दरवाजा तोड़कर निकाला गया था।

Location :  Bareilly

Published :  22 June 2026, 4:34 PM IST