जामनगर के वडीनार पोर्ट पर 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर एमटी नंदा देवी जहाज पहुंचा है। समुद्र में शिप-टू-शिप प्रक्रिया के जरिए गैस ट्रांसफर किया जाएगा। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

46,500 टन गैस लेकर पहुंचा जहाज
New Delhi: गहरे समुद्र में चल रही गतिविधियां अक्सर आम लोगों की नजर से दूर रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये ऑपरेशन इतने बड़े होते हैं कि उनका असर सीधे देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ जाता है। मंगलवार की तड़के सुबह ऐसा ही एक हाई-वैल्यू ऑपरेशन गुजरात के तट पर देखने को मिला, जब भारी मात्रा में एलपीजी लेकर एक विशाल जहाज भारतीय जल सीमा में दाखिल हुआ। सुरक्षा से लेकर तकनीकी प्रक्रिया तक हर कदम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि जरा सी चूक बड़ा खतरा बन सकती है।
Vadinar Port पर मंगलवार सुबह एलपीजी से भरा विशाल जहाज MT Nanda Devi पहुंचा। यह जहाज करीब 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। Deendayal Port Authority के चेयरमैन Sushil Kumar Singh के मुताबिक, जहाज सुबह करीब 2:30 बजे एंकरिज क्षेत्र में पहुंच गया था और इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई।
इस बार खास बात यह है कि एलपीजी का ट्रांसफर सीधे पोर्ट पर नहीं, बल्कि गहरे समुद्र में किया जाएगा। इसके लिए शिप-टू-शिप (STS) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। MT BW Birch नाम के दूसरे जहाज में यह गैस ट्रांसफर की जाएगी। यह प्रक्रिया काफी संवेदनशील होती है, जिसमें दोनों जहाज समुद्र के बीच एक तय दूरी पर स्थिर रहते हैं और पाइपलाइनों के जरिए गैस का ट्रांसफर किया जाता है।
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इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन के दौरान Sushil Kumar Singh ने जहाज के कैप्टन और क्रू मेंबर्स से मुलाकात की। उन्होंने सुरक्षित तरीके से कार्गो को भारत तक पहुंचाने के लिए उनका धन्यवाद किया। ,साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान हर जरूरी मदद उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसी तरह की तकनीकी या सुरक्षा समस्या न आए।
MT Nanda Devi हाल के दिनों में दूसरा ऐसा भारतीय जहाज है, जिसने Strait of Hormuz जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर सुरक्षित भारत तक पहुंच बनाई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां अक्सर सुरक्षा चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे में जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन के लिए राहत की खबर है।
इससे एक दिन पहले MT Shivalik नाम का एलपीजी कैरियर करीब 40,000 मीट्रिक टन गैस लेकर Mundra Port पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, इस गैस का एक हिस्सा मुंद्रा में ही उतारा जाएगा, जबकि बाकी को Mangalore भेजा जाएगा। इससे साफ है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में गैस की सप्लाई को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।
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मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय जहाजों और कार्गो मूवमेंट पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हर जहाज की मूवमेंट को मॉनिटर किया जा रहा है ताकि क्रू और कार्गो दोनों सुरक्षित रहें।
एलपीजी का सफर समुद्र से शुरू होकर सीधे आपके घर के चूल्हे तक पहुंचता है, लेकिन इसके पीछे एक लंबी और व्यवस्थित प्रक्रिया होती है। जब जहाज पोर्ट पर पहुंचता है, तो बड़े पाइपों के जरिए गैस को इंपोर्ट टर्मिनल तक पहुंचाया जाता है। यहां विशाल टैंकों में गैस को स्टोर किया जाता है। इसके बाद इसे पाइपलाइन या बड़े रोड टैंकरों के जरिए देश के अलग-अलग बोटलिंग प्लांट्स तक भेजा जाता है। बोटलिंग प्लांट में सिलिंडरों की जांच की जाती है, फिर उनमें तय मात्रा में गैस भरी जाती है और उन्हें सील किया जाता है।