धीरूभाई का वो ‘सीक्रेट फॉर्मूला’ जिसने बदल दी Reliance की किस्मत, बेटे मुकेश ने अगली पीढ़ी को सौंपा वही खास पावर बुस्टर

एशिया के सबसे अमीर लोगों में से एक मुकेश अंबानी अब रिलायंस की कमान अगली पीढ़ी को सौंप रहे हैं। उन्होंने बताया है कि कैसे उन्होंने अपने बिनेस को इतना बड़ा बनाया और इसे देश की सबसे बड़ी कंपनी के तौर पर स्थापित किया। आइए मुकेश अंबानी की सफल बिजनेस स्ट्रेटेजी पर एक नजर डालते हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 July 2026, 2:45 PM IST

New Delhi: यह हर कोई जानता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन Mukesh Ambani न सिर्फ भारत बल्कि एशिया के सबसे अमीर और प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक रहे हैं। अभी उनकी कुल संपत्ति लगभग 8.51 लाख करोड़ रुपये है और ग्लोबल कॉर्पोरेट जगत में उनका काफी दबदबा है। हालांकि, इस सफलता का राज सिर्फ उनके पिता Dhirubhai Ambani से मिली भारी-भरकम संपत्ति में नहीं है, बल्कि उस खास 'बिजनेस मंत्र' में है जो उनके पिता ने उन्हें सिखाया था और जिसे मुकेश अंबानी अब अगली पीढ़ी को भी सिखा रहे हैं।

मुकेश अंबानी को यहां से मिली सीख

मुकेश अंबानी पहले ही साफ कर चुके हैं कि कंपनी की कमान धीरे-धीरे उनके बच्चों के हाथ में जा रही है, लेकिन उनके मुताबिक असली विरासत सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि काम करने का तरीका और सोच है। यही सीख उन्हें अपने पिता धीरूभाई अंबानी से मिली थी।

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पिता ने दी फैसले लेने की पूरी आजादी

आमतौर पर माना जाता है कि बड़े बिजनेस घरानों में अगली पीढ़ी को सिर्फ बनी-बनाई लीक पर चलना होता है, लेकिन मुकेश अंबानी के मामले में ऐसा नहीं था। साल 2008 में दिए एक इंटरव्यू में मुकेश अंबानी ने खुलासा किया था कि उनके पिता धीरूभाई अंबानी ने उनके साथ कभी किसी 'ट्रेनी' जैसा व्यवहार नहीं किया। उन्होंने शुरू से ही अपने फैसले खुद लेने, नए आइडिया पर काम करने और जोखिम उठाने की आजादी दी। यही भरोसा आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

इसी सोच से खड़ा हुआ बड़ा कारोबार

मुकेश अंबानी का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को अपनी तरह से काम करने की आजादी मिले तो वह बेहतर फैसले ले सकता है। इसी सोच के दम पर रिलायंस ने तेल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ-साथ टेलीकॉम, रिटेल और डिजिटल कारोबार में भी बड़ी सफलता हासिल की।

अब बच्चों को भी मिल रही वही सीख

मुकेश अंबानी अपने तीनों बच्चों आकाश, ईशा और अनंत अंबानी को भी इसी तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें अलग-अलग कारोबार की जिम्मेदारी दी गई है और अपने फैसले लेने की छूट भी दी जा रही है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को भरोसा और अवसर दोनों मिलेंगे, तभी वे बेहतर नेतृत्व कर पाएंगे।

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भरोसा ही बना सफलता का सबसे बड़ा मंत्र

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत लौटे मुकेश अंबानी ने अपने पिता के साथ कारोबार संभाला। आज उनकी गिनती दुनिया के बड़े उद्योगपतियों में होती है। उनकी सफलता के पीछे सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि पिता का वह भरोसा भी है, जिसने उन्हें अपनी पहचान बनाने का मौका दिया। अब वही सफलता का मंत्र रिलायंस की अगली पीढ़ी को भी सौंपा जा रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  16 July 2026, 2:44 PM IST