उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर बड़ा फैसला: शासन ने बढ़ाई समय-सीमा, जानें नई तारीख

उत्तराखंड शासन ने वार्षिक स्थानांतरण की अंतिम तिथि 10 जून से बढ़ाकर 30 जून कर दी है। विभागों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए समय-सीमा में 20 दिन की बढ़ोतरी की गई है, जिससे पारदर्शी तबादलों में मदद मिलेगी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 June 2026, 10:31 AM IST

Dehradun: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण (Annual Transfers) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। शासन ने स्थानांतरण आदेश जारी करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है, जिससे अब विभिन्न सरकारी विभागों को तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।

नए आदेश के अनुसार, प्रदेश में अब 30 जून 2026 तक वार्षिक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इससे पहले तक राज्य में स्थानांतरण एक्ट के नियमानुसार तबादलों के लिए 10 जून की समय-सीमा निर्धारित रहती थी, लेकिन व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने इसमें ढील दी है।

शासन ने विभागों को दी 20 दिन की अतिरिक्त मोहलत

अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत की ओर से मंगलवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण संबंधी कार्यवाहियों में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और विभिन्न महकमों से प्राप्त अनुरोधों व अपेक्षाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

अब स्थानांतरण आदेश निर्गत करने की डेडलाइन 10 जून के स्थान पर 30 जून होगी। इसके साथ ही, स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़ी अन्य सभी प्रारंभिक कार्यवाहियों की समय-सीमा में भी समान रूप से 20 दिनों की वृद्धि कर दी गई है। इस फैसले से विभागों को तबादला प्रस्तावों की बारीक जांच करने, उन पर उच्च स्तर से अनुमोदन (Approval) लेने और अंतिम आदेश जारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

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बीमार और अनुरोध वाले मामलों का विभागीय स्तर पर ही होगा निपटारा

शासन ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल और विकेंद्रीकृत करने की कोशिश की है। सभी विभागों को यह स्पष्ट हिदायत दी गई है कि गंभीर बीमारी और व्यक्तिगत अनुरोध (Request) के आधार पर होने वाले स्थानांतरण के सभी प्रकरणों को अब अनिवार्य रूप से विभागीय स्तर पर ही निपटाया जाए।

शासन का मानना है कि इन मामलों को अनावश्यक रूप से ऊपर न भेजा जाए। केवल वही विशिष्ट या पेंचीदा मामले शासन के समक्ष लाए जाएं, जिनमें विभागीय स्तर पर निर्णय ले पाना पूरी तरह असंभव साबित हो रहा हो। ऐसे में इस बढ़े हुए समय का उपयोग विभाग अपने स्तर पर लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए करेंगे।

समय-सीमा बढ़ने से कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत

इस फैसले के पीछे का एक बड़ा कारण यह भी है कि कई विभागों में तय समय-सीमा (10 जून) के भीतर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से निपटाना मुश्किल हो रहा था। कई कर्मचारी संगठनों और विभागीय प्रमुखों ने शासन से समय बढ़ाने की मांग की थी।

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अब समय-सीमा में 20 दिन की बढ़ोतरी होने से न केवल प्रशासनिक फेरबदल व्यवस्थित ढंग से हो पाएंगे, बल्कि उन कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी जो बीमारी या किसी अन्य गंभीर पारिवारिक वजह से अपने गृह जिले या सुगम स्थानों पर तबादले की उम्मीद लगाए बैठे थे।

Location :  Dehradun

Published :  10 June 2026, 10:31 AM IST