
बिहार-मिथिला का लोक नृत्य (img: AI)
Patna: अक्सर बिहार की सांस्कृतिक पहचान को भोजपुरी सिनेमा के कमर्शियल गानों तक ही सीमित कर दिया जाता है, लेकिन राज्य की असली आत्मा उसकी सदियों पुरानी लोक परंपराओं में बसती है। ऐसी ही एक अनमोल परंपरा है 'डोमकच' लोक नृत्य, जो बिहार के मिथिला और भोजपुर इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड में भी शादी-ब्याह के जश्न का एक अहम हिस्सा है।
डोमकच सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं है; इसकी जड़ें एक अहम सामाजिक इतिहास से जुड़ी हैं। पुराने समय में जब बारात घर से निकलती थी, तो घर के सभी पुरुष सदस्य उसके साथ चले जाते थे। इससे घर पर चोरों और डकैतों के हमले का खतरा बना रहता था। इसलिए घर की रखवाली की जिम्मेदारी महिलाओं पर आ जाती थी। रात भर जागकर पहरा देने और माहौल को खुशनुमा बनाए रखने के लिए महिलाएं गाती-बजाती थीं और हंसी-मजाक करती थीं यही गतिविधियां आगे चलकर 'डोमकच' परंपरा के रूप में विकसित हुईं।
यह भी पढ़ें - Patna BPSC Protest: छात्रों ने तोड़े बैरिकेड, फिर पुलिस ने चलाया लाठीचार्ज और वाटर कैनन; पटना में मचा बवाल
डोमकच की एक खास बात यह है कि इसे पूरी तरह से महिलाएं ही आयोजित और प्रस्तुत करती हैं। शादी की रात महिलाएं आंगन में इकट्ठा होती हैं, एक घेरा बनाती हैं और ढोलक व मंजीरे की थाप पर नाचती हैं। गाने और नाचने के अलावा, वे पुरुषों के कपड़े पहनती हैं और छोटे-छोटे व्यंग्यात्मक नाटक करती हैं। इन प्रस्तुतियों के जरिए वे परिवार के सदस्यों जैसे दूल्हा, दुल्हन, सास और बड़े जीजा का किरदार निभाती हैं और पारिवारिक रिश्तों पर मजेदार टिप्पणियां करती हैं।
यह भी पढ़ें - Protest in Patna: बिहार में फिर बवाल, पटना में छात्रों का CM आवास कूच; भारी पुलिस फोर्स और तनाव
यह लोक नृत्य आपसी भाईचारे, महिलाओं की एकजुटता और खुशहाल वैवाहिक जीवन की उम्मीदों का प्रतीक है। मजाकिया बोलों और व्यंग्यात्मक गानों के जरिए, महिलाएं शादीशुदा जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों को जीवंत करती हैं। आज के आधुनिक दौर में भी बिहार की लोक कलाओं में डोमकच का एक खास स्थान है।
Location : Patna
Published : 31 August 2026, 2:27 PM IST