चीन बन सकता है दुनिया का नया ऑटो किंग, KPMG की रिपोर्ट ने बढ़ाई ग्लोबल कंपनियों की टेंशन

केपीएमजी की नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2035 तक दुनिया की 10 सबसे बड़ी ऑटो कंपनियों में से 6 चीन की होंगी। सॉफ्टवेयर, ईवी तकनीक और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग के दम पर चीनी कंपनियां फोर्ड और टोयोटा जैसे दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे रही हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 October 2026, 11:13 AM IST

New Delhi: ऑटोमोबाइल जगत में एक बहुत बड़ा भूचाल आने की तैयारी हो रही है। जाने-माने रिसर्च और कंसल्टिंग ग्रुप केपीएमजी (KPMG) की एक हालिया रिपोर्ट ने दुनिया भर के पारंपरिक कार निर्माताओं के होश उड़ा दिए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले कुछ ही सालों यानी 2035 तक ग्लोबल ऑटो मार्केट की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।

क्या कहती है केपीएमजी की रिपोर्ट?

केपीएमजी की ग्लोबल ऑटोमोटिव एग्जीक्यूटिव रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2035 तक दुनिया की टॉप-10 सबसे बड़ी ऑटोमेकर कंपनियों में से 6 के मुख्यालय सिर्फ चीन में होंगे। अब तक अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसी दिग्गज अर्थव्यवस्थाएं ऑटो सेक्टर पर राज करती आई हैं, लेकिन चीन की इस रफ्तार ने इन पुराने खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दे दी है। सर्वे में शामिल करीब 48 फीसदी अधिकारियों ने भी इस बात पर मुहर लगाई है कि 2035 तक वैश्विक ऑटो बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा चीनी कंपनियों के हाथ में होगा।

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कैसे पिछड़ रहे हैं अमेरिका और जापान के दिग्गज?

पारंपरिक रूप से फोर्ड, टोयोटा और वोक्सवैगन जैसी पुरानी कंपनियां बाजार पर हावी रही हैं। हालांकि, जिस तेजी से बीवायडी (BYD), जीली और श्याओमी जैसी चीनी कंपनियां बाजार में उतरी हैं, उसने समीकरण बदल दिए हैं। ये कंपनियां बहुत ही किफायती कीमत पर हाई-टेक और स्मार्ट इलेक्ट्रिक गाड़ियां पेश कर रही हैं। यहां तक कि फोर्ड जैसी दिग्गज कंपनी के अधिकारियों ने भी मान लिया है कि चीन की बेहद कम लागत वाली मैन्युफैक्चरिंग और सप्लायर चेन से मुकाबला करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सॉफ्टवेयर और एआई तय करेंगे जीत का भविष्य

आज के दौर में गाड़ियों का मतलब सिर्फ उसकी बॉडी या दमदार इंजन नहीं रह गया है। मुकाबला अब पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर टिक गया है-

सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (Software-Defined Vehicles)

एडवांस्ड ड्राइविंग असिस्टेंस और स्मार्ट कॉकपिट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित फीचर्स

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल 51 फीसदी अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में ग्राहक गाड़ी खरीदते समय उसके डिजिटल फीचर्स को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देंगे। चीन एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में एआई और ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीक को तेजी से अपनाने के मामले में दुनिया भर में सबसे आगे निकल चुका है।

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वैश्विक बाजार पर क्या होगा असर?

कई देशों द्वारा चीनी कारों पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाने और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद चीनी कंपनियों की मजबूत रिसर्च, तेज उत्पादन क्षमता और कम लागत उन्हें ग्लोबल मार्केट में अजेय बना रही है। यदि पश्चिमी और यूरोपीय देश खुद को इस नई सॉफ्टवेयर और ईवी तकनीक के मुताबिक नहीं ढाल पाए, तो 2035 तक चीन को ऑटो जगत का बेताज बादशाह बनने से रोकना असंभव हो जाएगा।

Location :  New Delhi

Published :  23 October 2026, 11:13 AM IST