
गाय की बछिया को माना लक्ष्मी (Img: X)
Shravasti: बेटी की चाहत में कई साल तक मन्नतें मांगने के बाद भी जब घर में बेटी नहीं हुई तो किसान नग्गू के परिवार ने गाय की बछिया को ही बेटी मान लिया। गाय ने करीब 12 दिन पहले एक बछिया को जन्म दिया तो परिवार ने उसका नाम लक्ष्मी रखा। इसके बाद घर में ऐसा जश्न हुआ कि गांव के लोग भी इस अनोखे आयोजन को देखने और शामिल होने पहुंच गए।
यह मामला इकौना क्षेत्र के कोरी पुरवा महजिदिया गांव का बताया जा रहा है। नग्गू के परिवार में पहले से तीन बेटे हैं। बेटी नहीं होने की कमी परिवार को हमेशा महसूस होती थी। ऐसे में गाय के बछिया को जन्म देने के बाद परिवार ने उसे बेटी की तरह अपनाया। परिवार ने बछिया की छठी और फिर बरही की रस्म भी उसी तरह निभाई, जैसे घर में बेटी के जन्म के बाद की जाती है। बछिया का नाम लक्ष्मी रखा गया और उसके जन्म की खुशी में घर पर विशेष आयोजन किया गया।
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बरही के कार्यक्रम में गांव के करीब 45 से 50 परिवारों के लोगों को निमंत्रण दिया गया था। परिवार ने करीब 200 से 250 लोगों के लिए भोजन तैयार कराया। सीमित साधनों में रहने वाले नग्गू के परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार आयोजन को यादगार बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
रात में घर पर डीजे भी लगाया गया। गांव के बच्चे डीजे की धुन पर जमकर नाचे, जबकि महिलाओं ने सोहर गाकर खुशी मनाई। देर रात तक घर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
नग्गू के मुताबिक, बछिया के जन्म पर इस तरह खुशी मनाने का यह पहला मौका नहीं है। करीब तीन साल पहले वह बलरामपुर के राजापुर भरिया में ईंट-भट्ठे पर काम करते थे। उस दौरान भी उनकी गाय ने एक बछिया को जन्म दिया था। तब भी नग्गू ने उसे बेटी मानते हुए बरही का आयोजन किया था। उनका कहना है कि गाय और उसकी बछिया परिवार का हिस्सा हैं और उन्हें बेटी की तरह ही प्यार दिया जाता है।
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इस अनोखी बरही में शामिल ग्रामीणों ने भी परिवार की भावना की सराहना की। ग्रामीण विनोद कुमार ने कहा कि बछिया को बेटी मानकर बरही मनाने से गौसेवा का संदेश मिलता है। उनका कहना है कि गोवंश के साथ मारपीट करने के बजाय उनकी देखभाल और सेवा की जानी चाहिए।
Location : Shravasti
Published : 24 September 2026, 12:09 PM IST