“हमारे घर बेटी आई है…” तीन बेटों के बाद बछिया को माना लक्ष्मी, श्रावस्ती में 250 लोगों को कराया भोज

श्रावस्ती में एक परिवार ने गाय की बछिया को बेटी मानकर ऐसा आयोजन किया कि पूरा गांव चर्चा करने लगा। तीन बेटों के बाद घर आई बछिया का नाम लक्ष्मी रखा गया और उसकी छठी-बरही की रस्म धूमधाम से मनाई गई।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 24 September 2026, 12:10 PM IST

Shravasti: बेटी की चाहत में कई साल तक मन्नतें मांगने के बाद भी जब घर में बेटी नहीं हुई तो किसान नग्गू के परिवार ने गाय की बछिया को ही बेटी मान लिया। गाय ने करीब 12 दिन पहले एक बछिया को जन्म दिया तो परिवार ने उसका नाम लक्ष्मी रखा। इसके बाद घर में ऐसा जश्न हुआ कि गांव के लोग भी इस अनोखे आयोजन को देखने और शामिल होने पहुंच गए।

बछिया के जन्म पर मनाई छठी और बरही

यह मामला इकौना क्षेत्र के कोरी पुरवा महजिदिया गांव का बताया जा रहा है। नग्गू के परिवार में पहले से तीन बेटे हैं। बेटी नहीं होने की कमी परिवार को हमेशा महसूस होती थी। ऐसे में गाय के बछिया को जन्म देने के बाद परिवार ने उसे बेटी की तरह अपनाया। परिवार ने बछिया की छठी और फिर बरही की रस्म भी उसी तरह निभाई, जैसे घर में बेटी के जन्म के बाद की जाती है। बछिया का नाम लक्ष्मी रखा गया और उसके जन्म की खुशी में घर पर विशेष आयोजन किया गया।

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200 से 250 लोगों के लिए तैयार हुआ खाना

बरही के कार्यक्रम में गांव के करीब 45 से 50 परिवारों के लोगों को निमंत्रण दिया गया था। परिवार ने करीब 200 से 250 लोगों के लिए भोजन तैयार कराया। सीमित साधनों में रहने वाले नग्गू के परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार आयोजन को यादगार बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

रात में घर पर डीजे भी लगाया गया। गांव के बच्चे डीजे की धुन पर जमकर नाचे, जबकि महिलाओं ने सोहर गाकर खुशी मनाई। देर रात तक घर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

तीन साल पहले भी मनाई थी बछिया की बरही

नग्गू के मुताबिक, बछिया के जन्म पर इस तरह खुशी मनाने का यह पहला मौका नहीं है। करीब तीन साल पहले वह बलरामपुर के राजापुर भरिया में ईंट-भट्ठे पर काम करते थे। उस दौरान भी उनकी गाय ने एक बछिया को जन्म दिया था। तब भी नग्गू ने उसे बेटी मानते हुए बरही का आयोजन किया था। उनका कहना है कि गाय और उसकी बछिया परिवार का हिस्सा हैं और उन्हें बेटी की तरह ही प्यार दिया जाता है।

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गांव में चर्चा का विषय बना आयोजन

इस अनोखी बरही में शामिल ग्रामीणों ने भी परिवार की भावना की सराहना की। ग्रामीण विनोद कुमार ने कहा कि बछिया को बेटी मानकर बरही मनाने से गौसेवा का संदेश मिलता है। उनका कहना है कि गोवंश के साथ मारपीट करने के बजाय उनकी देखभाल और सेवा की जानी चाहिए।

Location :  Shravasti

Published :  24 September 2026, 12:09 PM IST