हाई कोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए थे, जिसके विरुद्ध हल्द्वानी के अब्दुल मतीन सिद्दीकी सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश पर रोक लगा दी थी।

Supreme Court
Nainital: हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हुई थी। अब इस मामले में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की संयुक्त पीठ ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अहम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार व रेलवे को आदेश दिए हैं कि अवैध कब्जेदारों को पीएम आवास योजना जैसी योजनाओं के तहत योग्य पात्रों की पहचान कर राहत दी जाए। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रभावितों का पुनर्वास पीएम आवास योजना से संभव हो सकेगा।
पुनर्वास शिविर आयोजित किये जाएं
कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को जिलाधिकारी नैनीताल, एसडीएम हल्द्वानी के सहयोग से पुनर्वास शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि पात्र आवेदकों की पहचान हो सके। सरकार को निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी कर रिपोर्ट दाखिल की जाए। रिपोर्ट में प्रभावितों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख करना होगा। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए दोनों तरफ खाली जगह की जरूरत होती है। वहां रहने वाले लोग यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को लाइन वगैरह कहां बिछानी चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संयुक्त पीठ में सुनवाई के दौरान जस्टिस जायमाल्या बागची ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि यह राज्य की जमीन है और जमीन का इस्तेमाल कैसे करना है, यह तय करना राज्य का अधिकार है। अब मुद्दा यह है कि जब प्रभावितों को जाने के लिए कहा जाएगा, तो उनका पुनर्वास कैसे किया जाएगा ताकि उन्हें कुछ सहारा मिल सके।
सुनवाई में असिस्टेंट सॉलीसीटर जनरल ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान सरकार और रेलवे की ओर से पेश असिस्टेंट सॉलीसीटर जनरल एश्वर्या भाटी ने कहा कि बनभूलपुरा क्षेत्र में अतिक्रमण की जद में आइ भूमि का एक हिस्सा राज्य का है और रेलवे के लिए दिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि पीएम आवास योजना के तहत क्या राज्य कुछ जमीन ले सकता है और मुआवजे के बदले घर बनाकर दिए जा सकते हैं। इसमें भविष्य की पीढ़ी का पहलू भी है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि अपील करने वालों को उस जगह पर पुनर्वास के लिए जोर देने का कोई अधिकार नहीं है, जो रेलवे साइट के विस्तार के लिए जरूरी है। पीएम आवास योजना के तहत याचिकाकर्ता पुनर्वास के लिए अप्लाई कर सकते हैं, उनमें अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी में आएंगे।
डीएम, एसडीएम को दी जाए आवेदन फार्म की कॉपी
पीठ ने नैनीताल के डीएम, हल्द्वानी के एसडीएम सहित राजस्व अधिकारियों को पीएम आवास योजना के तहत आवेदन फार्म की एक कॉपी देने का निर्देश दिए। कोर्ट ने काउंसलर, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों के माध्यम से पीएम आवास योजना के लाभ बताने को भी कहा है।
हाई कोर्ट ने दिए थे अतिक्रमण हटाने के आदेश
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए थे, जिसके विरुद्ध हल्द्वानी के अब्दुल मतीन सिद्दीकी सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश पर रोक लगा दी थी। बनभूलपुरा क्षेत्र में 50 हजार से अधिक की आबादी निवास करती है।