विकसित भारत 2047 का सपना होगा पूरा! सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स में युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

सुल्तानपुर के केएनआईटी में आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान में एमएनएनआईटी प्रयागराज के डॉ. बसंत कुमार ने इलेक्ट्रॉनिकी, सेमीकंडक्टर, AI, रोबोटिक्स और IoT की बढ़ती भूमिका पर जानकारी दी।

Post Published By: Prashant Sharma
Updated : 31 October 2026, 12:08 PM IST

Sultanpur News: सुल्तानपुर में तकनीकी शिक्षा और रोजगार के भविष्य को लेकर एक अहम चर्चा हुई। आने वाले समय में देश की तकनीकी ताकत बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलने में इलेक्ट्रॉनिकी और सेमीकंडक्टर तकनीक की बड़ी भूमिका रहने वाली है। इसी को लेकर कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान (केएनआईटी) में विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें एमएनएनआईटी प्रयागराज के प्राध्यापक डॉ. बसंत कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि विकसित भारत @2047 का सपना पूरा करने में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिकी और सेमीकंडक्टर उद्योग किस तरह अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने और बदलते दौर की जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार करने का संदेश दिया।

इलेक्ट्रॉनिकी और सेमीकंडक्टर उद्योग में छिपे हैं रोजगार के बड़े अवसर

शनिवार, 31 अक्टूबर को केएनआईटी के इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी विभाग में ‘सर्वव्यापी इलेक्ट्रॉनिकी: विकसित भारत @2047 का प्रवेश द्वार’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे डॉ. बसंत कुमार ने विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिकी के तेजी से बदलते स्वरूप और भविष्य में इसकी बढ़ती जरूरतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और सेमीकंडक्टर जैसी तकनीकें आने वाले समय में देश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन क्षेत्रों में लगातार बढ़ती जरूरतों के चलते प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार और करियर के नए अवसर भी सामने आ रहे हैं।

चिप डिजाइन से लेकर हार्डवेयर डेवलपमेंट तक बढ़ेंगी संभावनाएं

डॉ. बसंत कुमार ने कहा कि वीएलएसआई (VLSI), चिप डिजाइन, एफपीजीए (FPGA), एम्बेडेड सिस्टम और हार्डवेयर विकास जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने में इन क्षेत्रों का योगदान महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रायोगिक परियोजनाओं पर काम करना, इंटर्नशिप करना और औद्योगिक प्रशिक्षण लेना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक तकनीकी चुनौतियों को समझने और अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने का मौका मिलेगा।

निदेशक ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित

कार्यक्रम की शुरुआत इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी गंगवार ने मुख्य वक्ता डॉ. बसंत कुमार के स्वागत के साथ की। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने आधुनिक तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग से जुड़ी जानकारियां हासिल कीं। कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के निदेशक प्रो. यूके माहेश्वरी ने मुख्य वक्ता डॉ. बसंत कुमार को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष विक्रम सिंह, सीएसए अध्यक्ष अभय अग्रवाल, प्रो. प्रदीप कुमार समेत संस्थान के अन्य शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में छात्र स्वयंसेवकों आशुतोष मिश्रा, सार्थक सिंह, सुयश सिंह और अनुकूल राय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Location :  Sultanpur

Published :  31 October 2026, 12:08 PM IST