
सुलतानपुर में दीपोत्सव की भव्य झाकी (Image Source: Dynamite News)
Sultanpur: अयोध्या में हुए 'दीपोत्सव' की भव्यता और वहां बने विश्व रिकॉर्ड की चर्चा पूरे देश और दुनिया में हो रही है। इसी बीच, अयोध्या से सटे जिले सुलतानपुर में एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जो दिवाली की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि गोमती नदी के किनारे स्थित दियारा घाट वही जगह है, जहां लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटते समय भगवान राम ने अपना पहला 'दीपदान' किया था। इस परंपरा को जीवित रखने के लिए, हर साल दिवाली के मौके पर यहां दीपक जलाए जाते हैं। इस वर्ष 'छोटी दिवाली' (दिवाली की पूर्व संध्या) पर, दियारा घाट 2,100 मिट्टी के दीपकों से जगमगा उठा।
सुलतानपुर के जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित दियारा घाट, धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से एक खास पहचान रखता है। पवित्र गोमती नदी के किनारे बसा यह प्राचीन स्थल रामायण काल की यादों से जुड़ा है। माना जाता है कि लंका पर विजय पाने के बाद, भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटते समय यहां पहुंचे थे। कहा जाता है कि इसी स्थान पर भगवान राम ने 'दीपदान' किया था। यही कारण है कि दियारा घाट दिवाली की प्राचीन परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
रंगोली बनाते हुए युवक (Image Source: Dynamite News)
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दियारा घाट के अलावा, आसपास के कई अन्य गांव और स्थान भी रामायण की घटनाओं से जुड़े माने जाते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर भगवान राम ने 'दीपदान' करने से पहले स्नान किया था, वह 'धोपप' के नाम से जाना जाने लगा। वहीं, 'दीपदान' के बाद उन्होंने जिस जगह पर रात में विश्राम किया था, उसे 'हरिशयनी' कहा जाने लगा। जिले के वरिष्ठ इतिहासकार राज खन्ना के अनुसार, इन स्थलों का उल्लेख सुलतानपुर जिला गजेटियर में भी मिलता है।
दियारा घाट पर स्थित प्राचीन राम-जानकी मंदिर और पास ही मौजूद हनुमान मंदिर, भक्तों के लिए आस्था के एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं। कहा जाता है कि दियारा कभी एक रियासत हुआ करती थी। यहां के मंदिरों की देखरेख दियारा के राजपरिवार द्वारा की जाती है। स्थानीय ग्रामीण इस धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को अपनी पहचान और गौरव का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।
'छोटी दिवाली' (दीवाली से एक दिन पहले) के अवसर पर, शनिवार को दियारा घाट पर एक विशेष 'दीपदान' कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्थानीय निवासियों और स्वयंसेवकों के सहयोग से, गोमती नदी के किनारे 2,100 मिट्टी के दीये जलाए गए, जिससे पूरा घाट एक दिव्य आभा से जगमगा उठा। इस कार्यक्रम में सुलतानपुर के भाजपा विधायक राज प्रसाद उपाध्याय भी शामिल हुए। भक्तों ने देश की समृद्धि और सभी नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए ये दीये जलाए।
गोमती आरती करते हुए स्थानीय विधायक (Image Source: Dynamite News)
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अयोध्या में 'दीपोत्सव' को मिली वैश्विक पहचान के बाद सुलतानपुर के लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। जिले के निवासी दियारा घाट, धोपाप और हरिशयानी जैसे स्थलों के संरक्षण की मांग कर रहे हैं ये स्थान रामायण काल और ऐतिहासिक धरोहर से गहराई से जुड़े हैं। उनकी मांग है कि इन जगहों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आस्था और इतिहास से जुड़ी यह विरासत राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना सके।
गोमती नदी के किनारे जलते ये दीये केवल रोशनी का स्रोत नहीं हैं बल्कि ये सदियों पुरानी आस्था, परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाते हैं। अब इस विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
Location : Sultanpur
Published : 8 November 2026, 10:38 AM IST