यूपी के सोनभद्र में मिला देश का सबसे बड़ा एंडालुसाइट खनिज भंडार, रोजगार और निवेश की बढ़ी उम्मीदें

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में देश का सबसे बड़ा एल्युमिनियम सिलिकेट (एंडालुसाइट) का भंडार मिला है। आईबीएम की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी-झारखंड सीमा पर 114.25 मिलियन टन खनिज का अनुमान है। इसके साथ ही क्षेत्र में सिलिमेनाइट का भी बड़ा भंडार मिला है, जिससे निवेश बढ़ेगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 30 June 2026, 4:51 PM IST

Sonbhadra: सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) में देश का सबसे बड़ा एल्युमिनियम सिलिकेट अयस्क (एंडालुसाइट) का भंडार मिला है। भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमा पर एंडालुसाइट के छह नए ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। इस पूरे भंडार का 91 प्रतिशत हिस्सा यानी लगभग 114.25 मिलियन टन अकेले उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में होने का अनुमान लगाया गया है।

इस खोज के बाद भू-वैज्ञानिकों और औद्योगिक क्षेत्र में भारी उत्साह है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर ब्राजील और श्रीलंका को एंडालुसाइट के प्रमुख उत्पादक देशों में गिना जाता है, लेकिन अब भारत का यह क्षेत्र इस खनिज के मामले में एक बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है।

कोन-विंढमगंज क्षेत्र में चार चरणों का सर्वेक्षण पूरा

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की ओर से सोनभद्र के कोन-विंढमगंज क्षेत्र से जुड़े लगभग 48 वर्ग किलोमीटर इलाके में चार चरणों में व्यापक सर्वेक्षण किया गया है। वर्ष 2012-13 से लेकर 2020-21 तक चले इस सर्वेक्षण में बेहद उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। 1 अप्रैल 2020 तक की स्थिति के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के बाद अब इस क्षेत्र में विस्तृत शोध, ड्रिलिंग और संभावित व्यावसायिक खनन को लेकर प्रशासनिक और वैज्ञानिक प्रक्रियाएं तेज कर दी गई हैं।

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180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानों में छिपी है खनिज संपदा

इस खनिज भंडार की खोज में शैक्षणिक संस्थानों की भी अहम भूमिका रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के भू-वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने कई बार सोनभद्र जिले के खनिज भंडारों का विस्तृत सर्वे किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, रेणुकूट वन प्रभाग में स्थित जमतिहवा नाला की लगभग 180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानों से लेकर रजखड़ और दुद्धी के उत्तर की पहाड़ियों तक एंडालुसाइट की समृद्ध परतें मिलने की पुख्ता संभावनाएं जताई गई हैं।

छह फ्री होल्ड डिपॉजिट (ब्लॉक) की पहचान

आईबीएम की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमा पर एंडालुसाइट के कुल छह फ्री होल्ड डिपॉजिट (ब्लॉक) चिन्हित किए गए हैं। इनमें से पांच ब्लॉक सोनभद्र के सलईडीह-हरवरिया और फुलवार समेत आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां 114.25 मिलियन टन भंडार होने की उम्मीद है। वहीं, छठा ब्लॉक झारखंड के गढ़वा जिले के नगर-उंटारी क्षेत्र में मिला है, जहां लगभग 11.8 मिलियन टन (कुल भंडार का 9 प्रतिशत) एंडालुसाइट होने का अनुमान है।

24 से 26 प्रतिशत तक आंका गया औसत ग्रेड

सोनभद्र और झारखंड सीमा पर मिले इस एंडालुसाइट खनिज की गुणवत्ता काफी उच्च श्रेणी की है। जांच में इसका औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत तक आंका गया है। उत्तर प्रदेश और झारखंड के अलावा देश के कुछ अन्य राज्यों में भी इसके संकेत मिले हैं। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर, ओडिशा के मलकानगिरी, राजस्थान के झुंझुनू, नागौर और टोंक तथा उत्तर प्रदेश के ही मिर्जापुर जिले में भी एंडालुसाइट की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं।

सिलिमेनाइट खनिज के भी मिले विशाल भंडार

एंडालुसाइट के साथ-साथ सोनभद्र में एक और महत्वपूर्ण एल्युमिनो सिलिकेट खनिज 'सिलिमेनाइट' के भी बड़े भंडार होने के संकेत मिले हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, सोनभद्र जिले की दक्षिणी सीमा पर छत्तीसगढ़ से सटे बभनी-बीजपुर क्षेत्र की चट्टानों में सिलिमेनाइट बिखरे हुए क्रिस्टल के रूप में मौजूद है।

यह पूरी खनिज बेल्ट 600 मीटर से अधिक चौड़ी है और पूर्व में आसनडीह से लेकर पश्चिम में बाजिया गांव तक लगभग छह किलोमीटर से अधिक की दूरी में फैली हुई है। इस बेल्ट के मध्य भाग में स्थित छिपिया गांव के पास 200 मीटर चौड़े क्षेत्र में सिलिमेनाइट के बड़े क्रिस्टल मिले हैं। रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि इस बेल्ट के भीतर 10 से 25 मीटर चौड़े ऐसे विशिष्ट क्षेत्र हैं, जिनमें 16 से 32 प्रतिशत (औसतन 25 प्रतिशत) तक सिलिमेनाइट मौजूद है। इसका कुल अनुमानित भंडार लगभग 10 मिलियन टन बताया गया है।

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औद्योगिक क्षेत्रों और रत्नों के रूप में भारी उपयोगिता

एंडालुसाइट और सिलिमेनाइट खनिजों का व्यावसायिक और औद्योगिक महत्व बहुत अधिक है। पारदर्शी और रंगीन एंडालुसाइट को विशेष रूप से तराश कर आकर्षक रत्न (Gemstone) तैयार किए जाते हैं। औद्योगिक क्षेत्र की बात करें तो उच्च तापमान को सहन करने की क्षमता के कारण इसका मुख्य उपयोग इस्पात, सीमेंट और कांच उद्योगों की भट्टियों (Furnaces) के लिए अग्निरोधी (Refractory) ईंटें और ब्लॉक बनाने में होता है। यह खनिज बिना पिघले अत्यधिक तापमान और रासायनिक दबाव को झेल सकता है।

इसके अलावा, ऑटोमोबाइल स्पार्क प्लग, उच्च गुणवत्ता वाले सिरेमिक उत्पाद, इंसुलेटर, पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों और धातु ढलाई के सांचे व कोर बनाने में भी इन खनिजों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।

बड़े औद्योगिक निवेश और रोजगार की उम्मीद

सोनभद्र में मिले इस विशाल भंडार से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद है। लखनऊ विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विभूति राय के अनुसार, सोनभद्र में एंडालुसाइट का यह भंडार व्यावसायिक दृष्टि से बेहद उपयोगी है। आने वाले समय में यहां विस्तृत सर्वेक्षण पूरा होने और विधिवत खनन कार्य शुरू होने से जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए और बड़े अवसर विकसित होंगे।

Location :  Sonbhadra

Published :  30 June 2026, 4:51 PM IST