महराजगंज: अंग्रेजों के जुल्म से बचाने प्रकट हुई थीं हट्ठी माता, जानिए इस प्राचीन मंदिर का इतिहास

महराजगंज के सिसवा में स्थित हट्ठी माता मंदिर अगाध आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि अंग्रेजों के जुल्म से रक्षा के लिए माता यहाँ प्रकट हुई थीं। यहाँ सोमवार और शुक्रवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। माता सबकी मुरादें पूरी करती हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 October 2026, 12:22 PM IST

​Maharajganj: सिसवा वासियों के लिए 'हट्ठी माता' का स्थान केवल एक मंदिर भर नहीं, बल्कि अगाध आस्था, सुरक्षा और श्रद्धा का केंद्र है। यहाँ माता के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता से कामना करता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता; माता हर मुराद पूरी करती हैं।

प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को उमड़ती है भीड़

​प्राचीन काल से सिसवा कस्बे में स्थापित हट्ठी माता के मंदिर का विशेष महत्व है। वैसे तो यहाँ सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के दिनों के अलावा प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को सिसवा के लोग विशेष रूप से माता के दरबार में मत्था टेकने पहुँचते हैं। नवरात्रि के पावन पर्व पर माता को धार-कपूर और कढ़ाही चढ़ाने के लिए भक्तों का भारी भीड़ उमड़ता है।

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अंग्रेजों के जुल्म से मुक्ति और माता के प्राकट्य की कहानी

सिसवा ​कस्बे के पूर्व दिशा में इस्टेट परिसर के बगल में स्थापित इस मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक रोमांचक दास्तान है। बुजुर्गों के अनुसार, आजादी के पूर्व और मंदिर के निर्माण से पहले इस स्थान पर अंग्रेजों का डेरा हुआ करता था, जो स्थानीय सिसवावासियों पर तरह-तरह के जुल्म ढाते थे। ​मान्यता है कि अंग्रेजों के अत्याचारों से जनता की रक्षा करने के लिए माता नर देवी ने इस भूमि पर वास लिया था। माता के प्रभाव से अंग्रेज फिर किसी को प्रताड़ित नहीं कर सके।

किंवदंती है कि माता के आदेशानुसार स्वतंत्रता सेनानी करिया सिंह ने यहाँ सबसे पहले पिंड की स्थापना की थी। इसके बाद अंगेज लाख चाहकर भी करिया सिंह का बाल बांका नहीं कर पाए। ​समय बीतने के साथ उसी पिंड के स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया और पिंड को हाथी के रूप में स्थापित कर 'हट्ठी माता' के नाम से पूजा जाने लगा। आगे चलकर वर्ष 2015 में इस्टेट परिवार द्वारा यहाँ माता की भव्य संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गई।

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कुलदेवी के रूप में होती है पूजा

​इस्टेट परिवार सहित नगर के क्षत्रिय समाज के लोग इन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में पूरी श्रद्धा के साथ पूजते हैं। सिसवा कस्बे के लोगों अटूट विश्वास है कि कस्बे पर आने वाली किसी भी विपत्ति या दैवीय आपदा से हट्ठी माई हमेशा ढाल बनकर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

Location :  ​Maharajganj

Published :  16 October 2026, 12:22 PM IST