DN Exclusive: ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’; सिद्धार्थनगर में घोघी नदी के पानी में उतरे ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

सिद्धार्थनगर के कटहा और बरदहा के ग्रामीण वर्षों की उपेक्षा और पुल न होने से परेशान होकर घोघी नदी के पानी में उतर गए। उन्होंने 'पुल नहीं तो वोट नहीं' का नारा देते हुए आगामी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया है। पुल बनने से 20 किमी का फेरा मात्र 4 किमी रह जाएगा और नेपाल सीमा तक रास्ता सुलभ होगा।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 9 October 2026, 2:04 PM IST

Siddharthnagar: लोकतंत्र में जब जनता के सब्र का बांध टूटता है, तो उसका गुस्सा सड़कों और पानी के बीच साफ नजर आने लगता है। सिद्धार्थनगर जिले से एक ऐसी ही सुलगती हुई तस्वीर सामने आई है, जहां बुनियादी सुविधाओं से वंचित जनता ने अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। कटहा और बरदहा ग्राम सभा के बीच बहने वाली घोघी नदी के तट पर सैकड़ों ग्रामीण और युवा हाथों में बैनर लेकर सीधे पानी में उतर गए और 'पुल नहीं तो वोट नहीं' के नारों के साथ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

हर चुनाव में मिलते हैं सिर्फ कोरे आश्वासन

स्थानीय ग्रामीणों का मुख्य दर्द यह है कि वे पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में एक अदद पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जनता का आरोप है कि जब भी चुनाव आते हैं, तो नेता और जनप्रतिनिधि गांव में वोट मांगने के लिए पहुंचते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं। हालांकि, चुनाव संपन्न होते ही ये सारे वादे फाइलों में बंद होकर ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। नेताओं की इस लगातार वादाखिलाफी से आज जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि इस बार वे किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। जब तक पुल के निर्माण की ठोस और जमीनी शुरुआत नहीं होगी, तब तक वे आगामी चुनावों में पूरी तरह से मतदान का बहिष्कार करेंगे।

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शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार पर लगा ग्रहण

पुल के अभाव में कटहा और बरदहा के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग अब मजबूरी में गांव से पलायन करने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पुल न होने के कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, बच्चों की उच्च शिक्षा के रास्ते में बाधा आ रही है और किसी भी आपातकालीन चिकित्सीय जरूरत के समय समय पर अस्पताल पहुंचना असंभव सा हो जाता है।

वर्षों की उपेक्षा के बाद घोघी नदी पर पुल की मांग (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)

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20 किलोमीटर का चक्कर घटकर रह जाएगा 4 किलोमीटर

ग्रामीणों के अनुसार, घोघी नदी पर पुल न होने से उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए लंबा चक्कर काटना पड़ता है। वर्तमान में जो दूरी तय करने में 20 किलोमीटर का फेरा लगता है, वह पुल बन जाने के बाद मात्र 4 किलोमीटर रह जाएगी। इस पुल के निर्माण से केवल स्थानीय आवागमन ही सुगम नहीं होगा, बल्कि यह सीधा रास्ता नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों से भी जुड़ जाएगा। इससे पूरे इलाके में व्यापार, शिक्षा और विकास के नए द्वार खुलेंगे।

Location :  Siddharthnagar

Published :  9 October 2026, 2:04 PM IST