रायबरेली में इस बार नहीं जलेगा लकड़ी का रावण! लोहे के दशानन की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

रायबरेली के बस्तेपुर में इस बार रावण दहन की तैयारी कुछ अलग अंदाज में हो रही है। करीब 50 साल पुरानी रामलीला कमेटी ने लकड़ी की जगह लोहे का रावण तैयार कराया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 October 2026, 12:18 PM IST

Raebareli: दशहरे पर रावण दहन की परंपरा तो आपने कई बार देखी होगी, लेकिन क्या आपने कभी लोहे से बने रावण के बारे में सुना है? उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक रामलीला कमेटी ने कुछ ऐसा ही अनोखा कदम उठाया है, जो परंपरा के साथ पर्यावरण बचाने का संदेश भी दे रहा है। यहां लकड़ी की जगह लोहे से दशानन का ढांचा तैयार किया गया है।

खास बात यह है कि इस अनोखे रावण को बनाने के पीछे एक ऐसा विचार है, जो हर साल होने वाले खर्च को भी कम कर सकता है।

50 साल पुरानी रामलीला में इस बार कुछ अलग

रायबरेली के बस्तेपुर में पिछले करीब 50 साल से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। हर साल दशहरे के मौके पर रावण का पुतला तैयार किया जाता है, लेकिन इस बार कमेटी ने पुराने तरीके से हटकर कुछ नया करने का फैसला लिया। लकड़ी और दूसरी सामग्री से हर साल नया पुतला बनवाने के बजाय ऐसा ढांचा तैयार करने की योजना बनाई गई, जिसका बार-बार इस्तेमाल किया जा सके।

कमेटी की इसी सोच ने लोहे के रावण को जन्म दिया। अब यह पहल इलाके में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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यूट्यूब वीडियो देखकर तैयार कर दिया लोहे का दशानन

इस अनोखे रावण को तैयार करने की जिम्मेदारी स्थानीय विश्वकर्मा फैब्रिकेटर अनिल विश्वकर्मा ने संभाली। दिलचस्प बात यह है कि लोहे के रावण को बनाने के लिए उन्होंने यूट्यूब वीडियो की मदद ली। वीडियो देखकर उन्होंने इस ढांचे को तैयार किया और एक नए प्रयोग को हकीकत में बदल दिया।

यह पहल दिखाती है कि नई तकनीक और थोड़ी-सी रचनात्मक सोच से परंपराओं को निभाने के तरीके भी बदले जा सकते हैं। जहां पहले हर साल पुतला बनाने के लिए नई सामग्री जुटानी पड़ती थी, वहीं अब लोहे के ढांचे का दोबारा इस्तेमाल करने की उम्मीद है।

खर्च घटेगा और पर्यावरण को मिलेगा फायदा

हर साल रावण का पुतला बनाने में लकड़ी और दूसरी सामग्रियों का इस्तेमाल होता है। पुतला जलने पर धुआं भी निकलता है। ऐसे में बस्तेपुर रामलीला कमेटी की यह पहल लकड़ी की खपत कम करने और बार-बार होने वाले खर्च से बचने की दिशा में एक कोशिश है।

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हालांकि, लोहे का ढांचा तैयार होने भर से प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। इसके इस्तेमाल, दहन और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

परंपरा वही, लेकिन सोच नई

बस्तेपुर का लोहे का रावण सिर्फ एक नया प्रयोग नहीं, बल्कि बदलते समय के साथ परंपराओं को बेहतर बनाने की कोशिश भी है। करीब पांच दशक से चली आ रही रामलीला में इस पहल ने एक नई चर्चा शुरू कर दी है।

Location :  Raebareli

Published :  19 October 2026, 12:18 PM IST