मैनपुरी के ऐतिहासिक राजा का ताल पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जे का प्रयास तेज हो गया है। तालाब की जमीन पाटकर निर्माण की तैयारी से पर्यावरण और धरोहर दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। अब जनता प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।

मैनपुरी में भू-माफिया सक्रिय
Mainpuri: एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश भर में तालाबों, पोखरों और अन्य जल निकायों को संरक्षित करने के लिए 'अमृत सरोवर' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर मैनपुरी के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन 'राजा का ताल' पर भू-माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते नजर आ रहे हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित इस बेशकीमती तालाब की भूमि पर खुलेआम अवैध कब्जे और निर्माण की कोशिशें तेज हो गई हैं, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ समय से 'राजा का ताल' की जमीन को धीरे-धीरे पाटने का काम किया जा रहा है। मिट्टी डालकर भूमि समतल करने और निर्माण की तैयारी के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। यह न सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व के लिए खतरा है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और जल संरक्षण की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि यह तालाब समाप्त हुआ तो आसपास के इलाके में जलभराव, भूजल स्तर और तापमान पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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सूत्रों और स्थानीय नागरिकों के आरोपों के मुताबिक, इस अवैध कब्जे के पीछे रामबरन शाक्य, किशन, इसरार उर्फ बिल्ला और सेलू समेत कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्हें क्षेत्र में सक्रिय भू-माफिया के रूप में जाना जाता है। आरोप है कि ये लोग प्रभाव और दबदबे के बल पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और नियम-कानून की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार, 'राजा का ताल' की भूमि गाटा संख्या 2688, 643 और 789 पर तालाब के रूप में दर्ज है। राजस्व रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रूप से जल निकाय की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद, अवैध रूप से इस भूमि को निजी संपत्ति में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों ही तालाबों, पोखरों और अन्य जल निकायों पर किसी भी प्रकार के कब्जे को सख्ती से रोकने के आदेश दे चुके हैं। कई मामलों में अवैध कब्जों को हटाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई भी देखने को मिली है। इसके बावजूद मैनपुरी में भू-माफिया इन आदेशों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं।
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इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। क्षेत्रीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि 'राजा का ताल' मैनपुरी की पहचान और विरासत का हिस्सा है। इसे बचाना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब आमजन की निगाहें जिला प्रशासन और शासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते अवैध कब्जे पर रोक लगाएगा, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा और ऐतिहासिक तालाब को बचाएगा, या फिर यह धरोहर भू-माफियाओं की भेंट चढ़ जाएगी।