बृजमनगंज थाना क्षेत्र में कच्ची शराब अब सिर्फ गैरकानूनी कारोबार नहीं रही, बल्कि यह संगठित अपराध और कुटीर उद्योग का रूप ले चुकी है। गांव-गांव फैला यह नेटवर्क हर साल जिंदगियां निगल रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई दिखाई नहीं देती।

महराजगंज में कच्ची शराब बनी मौत का सौदा
Maharajganj: बृजमनगंज थाना क्षेत्र में कच्ची शराब अब सिर्फ गैरकानूनी कारोबार नहीं रही, बल्कि यह संगठित अपराध और कुटीर उद्योग का रूप ले चुकी है। गांव-गांव फैला यह नेटवर्क हर साल जिंदगियां निगल रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई दिखाई नहीं देती।
फुलमनहा ग्रामसभा में बीते पांच वर्षों के दौरान कच्ची शराब पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई और न ही अवैध भट्टियों को जड़ से खत्म किया गया। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या ये मौतें प्रशासन को नजर नहीं आईं, या फिर इन्हें फाइलों में दबा दिया गया।
भीलवाड़ा में व्यापारी से बड़ी लूट, बदमाशों ने लाखों पर किया हाथ साफ; जानें क्या है पूरा मामला
ग्रामीणों का आरोप है कि जब कच्ची शराब के खिलाफ आवाज उठाई गई तो शराब माफियाओं ने सरेआम मारपीट की। पीड़ित ने थाने में शिकायत की, लेकिन न्याय के बजाय उसे निराशा हाथ लगी। इससे सवाल उठता है कि क्या शराब माफिया कानून से ऊपर हो चुके हैं।
सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार बृजमनगंज थाना क्षेत्र का शायद ही कोई गांव बचा हो जहां कच्ची शराब न बनती और बिकती हो। फुलमनहा, लेहड़ा, दुर्गापुर, विशुनपुर अद्रवना, बचगंगपुर, बैसार, परगापुर, हथिगड़वा, पुरन्दरपुर और पृथ्वीपलगढ़ जैसे गांवों में जंगलों, टोलों और चौराहों पर अवैध भट्टियां धधक रही हैं।
लेहड़ा स्थित दुर्गा मंदिर के पास की स्थिति सबसे चिंताजनक है। आस्था के इस केंद्र से मात्र 300 मीटर की दूरी पर, पुलिस चौकी के नजदीक ही रोजाना कच्ची और देशी शराब की बिक्री होती है। मौसम कोई भी हो, शराबियों की महफिलें हर शाम सजती हैं।
जहां सरकारी शराब सौ रुपये से कम में नहीं मिलती, वहीं कच्ची शराब मात्र 30 रुपये में उपलब्ध है। नशा इतना तेज कि एक गिलास ही काफी। यही वजह है कि युवा ही नहीं, किशोर और बुजुर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
Video: गोरखपुर में बच्चों-महिलाओं के बीच Priyanka Gandhi का जन्मदिवस
ग्रामीणों का दावा है कि कम लागत, भारी मुनाफा और कथित पुलिस-आबकारी मिलीभगत के कारण यह धंधा फल-फूल रहा है। हफ्ता सिस्टम और संरक्षण के आरोप भी सामने आ रहे हैं। सवाल साफ हैं-जब मौतें हो रही थीं तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मंदिर और चौकी के पास शराब कैसे बिक रही है? आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार चल रहा है?