मौनी अमावस्या स्नान विवाद के बाद ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वसंत पंचमी स्नान से भी इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक माफी नहीं मांगता और सम्मानपूर्वक स्नान नहीं कराता, वे अपने निर्णय पर अडिग रहेंगे।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (img source: Google)
Prayagraj: प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर उपजा विवाद अब और गहराता जा रहा है। ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे वसंत पंचमी के पावन स्नान पर्व पर भी संगम में स्नान नहीं करेंगे। उनका यह निर्णय मौनी अमावस्या के दिन स्नान से रोके जाने की घटना के बाद लिया गया है, जिससे वे गहराई से आहत बताए जा रहे हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में कहा कि प्रशासन का व्यवहार उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक रहा है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता और उन्हें ससम्मान संगम स्नान कराकर शिविर में प्रवेश नहीं कराया जाता, तब तक वे अपने निर्णय पर अडिग रहेंगे। उनके अनुसार यह कोई विशेष सुविधा की मांग नहीं, बल्कि संत समाज और सनातन परंपरा के सम्मान का प्रश्न है।
अपने बयान में शंकराचार्य ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे हर वर्ष माघ मेले में आकर फुटपाथ पर ही बैठेंगे। उन्होंने इसे जिद नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का विषय बताया। उनके इस बयान के बाद मेला क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और संत समाज के बीच इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
शुक्रवार को वसंत पंचमी का प्रमुख स्नान पर्व है, जिसे माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण स्नानों में गिना जाता है। इस अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। प्रशासन घाटों की सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को अंतिम रूप देने में जुटा है। ऐसे में शंकराचार्य का यह रुख प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है।
बताया जा रहा है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के दौरान प्रशासनिक कारणों से शंकराचार्य को स्नान करने से रोका गया था। इसी घटना को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई है। संत समाज के एक वर्ग का मानना है कि यह सनातन परंपराओं का उल्लंघन और संतों के सम्मान पर आघात है। वहीं, अब तक प्रशासन की ओर से सार्वजनिक माफी न आने से असंतोष और गहराता जा रहा है।
शंकराचार्य के निर्णय पर संत समाज में अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ संत उनके रुख को उचित ठहरा रहे हैं और इसे परंपरा व सम्मान से जुड़ा विषय बता रहे हैं, जबकि कुछ संत संवाद और आपसी समझ से समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का विवाद माघ मेले की गरिमा और सौहार्द के लिए चिंता का विषय है।
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मेला क्षेत्र में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच भी यह मुद्दा चर्चा में है। कई श्रद्धालु शंकराचार्य के समर्थन में नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ लोग चाहते हैं कि विवाद का जल्द समाधान हो, ताकि वसंत पंचमी स्नान शांतिपूर्ण और धार्मिक माहौल में संपन्न हो सके।