क्या अब लखनऊ में नहीं मिलेंगे नए ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन? हाईकोर्ट के सख्त रुख से चालक हलकान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में ई-रिक्शा के बढ़ते ट्रैफिक जाम पर सख्त रुख अपनाते हुए यूपी सरकार को 4 हफ्ते में नए रजिस्ट्रेशन रोकने पर नीति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि नियमों के तहत शहर में वाहनों की संख्या सीमित करना जरूरी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 3 November 2026, 1:08 PM IST

Lucknow: लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम और बेकाबू होती ई-रिक्शा की संख्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अगर आप भी राजधानी की सड़कों पर रोजाना जाम से जूझते हैं, तो यह खबर आपके लिए सीधी राहत या बड़े बदलाव की आहट लेकर आई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले 4 हफ्ते के भीतर यह तय करे कि जिन शहरों में ई-रिक्शा जरूरत से ज्यादा हो चुके हैं, वहां इनके नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई जाए या नहीं।

क्या हुआ है और वजह क्या है?

मामला तब गंभीर हुआ जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में वकील सूरज सिंह विसेन की तरफ से एक जनहित याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अकेले लखनऊ शहर में इस समय लगभग 1.33 लाख ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में बिना व्यवस्थित प्लानिंग के चल रहे इन वाहनों की वजह से शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है और मुख्य मार्गों पर भारी जाम की समस्या आम हो गई है। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस ए के चौधरी की बेंच ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई।

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कानूनी स्थिति और प्रशासनिक निर्देश

अदालत ने साफ किया कि केंद्र सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट दिए जाने का कतई यह मतलब नहीं है कि ई-रिक्शा को सड़कों पर बिना पंजीकरण के बेधड़क चलाया जाए। मोटर वाहन अधिनियम और मोटर वाहन नियम, 1998 (नियम 178) का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास पूरा अधिकार है कि वह अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में इनकी आवाजाही को नियंत्रित करे और नए रजिस्ट्रेशन सीमित करे।

ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या (सोर्स-Pinterest)

क्या होगा इसका असर?

इस आदेश का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो नया ई-रिक्शा खरीदने की सोच रहे हैं या ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) को यह निर्देश भी दिए हैं कि वे प्रतिबंधित रास्तों पर ई-रिक्शा का संचालन पूरी तरह बंद कराएं और जहां रोक लगाई जाए, वहां चालकों व यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग भी तय किए जाएं। ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए आईआईटी-बीएचयू (IIT-BHU) द्वारा कामता क्रॉसिंग और पॉलीटेक्निक-कामता-चिनहट कॉरिडोर पर एक स्वतंत्र ट्रैफिक स्टडी भी कराई जाएगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी, और तब तक राज्य सरकार को अदालत के सामने अपनी अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।

Location :  Lucknow

Published :  3 November 2026, 1:08 PM IST