बाजीराव और मस्तानी की Love Story फिर होगी जिंदा: महोबा के ऐतिहासिक महल में बनेगा म्यूजियम, लाइट एंड साउंड शो की तैयारी

महोबा के जैतपुर स्थित ऐतिहासिक मस्तानी महल के जीर्णोद्धार की तैयारी चल रही है। पर्यटन विभाग ने सर्वे पूरा कर लिया है और अब एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित योजना में लाइट एंड साउंड शो, म्यूजियम, लाइब्रेरी, ओपन एयर थिएटर और कैफे जैसी सुविधाएं शामिल हैं। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद आगे का काम शुरू हो सकेगा।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 25 October 2026, 5:09 PM IST
Mahoba News: बाजीराव और मस्तानी की चर्चित प्रेम कहानी से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को नया रूप देने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के जैतपुर कस्बे में स्थित मस्तानी महल लंबे समय से बदहाली का सामना कर रहा है, लेकिन अब पर्यटन विभाग इसके संरक्षण और विकास की योजना पर काम कर रहा है। महल में लाइट एंड साउंड शो, म्यूजियम, लाइब्रेरी, ओपन एयर थिएटर और कैफे जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। महल का सर्वे पूरा हो चुका है और फिलहाल जीर्णोद्धार पर आने वाले खर्च का आकलन किया जा रहा है। हालांकि, परियोजना को मंजूरी मिलने और काम शुरू होने की तारीख अभी तय नहीं है।

बदहाल ऐतिहासिक महल को संवारने की तैयारी

महोबा के जैतपुर में स्थित मस्तानी महल बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। स्थानीय ऐतिहासिक परंपराओं में इस महल का संबंध पेशवा बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी से जोड़ा जाता है। लंबे समय से उचित देखरेख और मरम्मत के अभाव में भवन के कई हिस्सों को संरक्षण की जरूरत है।

पर्यटन विभाग इस धरोहर को संरक्षित कर पर्यटकों के लिए बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है। इसके लिए कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस के आर्किटेक्ट दक्ष बब्बर और अबरार ने एक अक्टूबर को महल का निरीक्षण किया था। टीम ने भवन की मौजूदा स्थिति का आकलन करते हुए कंडीशन मैपिंग और ड्राइंग तैयार की। अब इन जानकारियों के आधार पर जीर्णोद्धार का एस्टीमेट बनाया जा रहा है।

लाइट एंड साउंड शो से दिखेगा इतिहास

प्रस्तावित योजना में लाइट एंड साउंड शो प्रमुख आकर्षण हो सकता है। इसके माध्यम से महल और बुंदेलखंड के इतिहास से जुड़े प्रसंगों को रोशनी और ध्वनि के जरिए प्रस्तुत करने की योजना है। इसके अलावा म्यूजियम और लाइब्रेरी बनाए जाने का प्रस्ताव भी है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ओपन एयर थिएटर और पर्यटकों के लिए कैफे जैसी सुविधाएं विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

हालांकि, इन सुविधाओं का निर्माण परियोजना के बजट, प्रशासनिक मंजूरी और अंतिम योजना पर निर्भर करेगा। फिलहाल इन्हें प्रस्तावित सुविधाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

छत्रसाल, बाजीराव और मस्तानी की विरासत

इतिहासकार डॉ. एलसी अनुरागी के अनुसार, मस्तानी महल का संबंध बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल और पेशवा बाजीराव के दौर से जोड़ा जाता है। मुगल सेनापति मुहम्मद खान बंगश के आक्रमण के समय छत्रसाल ने बाजीराव से सहायता मांगी थी। इस प्रसंग से प्रसिद्ध पंक्ति ‘बाजी जात बुंदेल की, बाजी राखौ बाजीराव’ जुड़ी हुई है।

स्थानीय ऐतिहासिक परंपराओं में इसी दौर से बाजीराव और मस्तानी के संबंधों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, महल के इतिहास और उसके निर्माण से जुड़े विवरणों की पुष्टि के लिए ऐतिहासिक अभिलेखों का संदर्भ महत्वपूर्ण है।

पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को मिल सकती है राहत

महल के संरक्षण के प्रयासों से जुड़े डॉ. सतीश राजपूत के मुताबिक, यहां रोजाना करीब 40 से 50 पर्यटक पहुंचते हैं। उनका कहना है कि भवन की मरम्मत और बेहतर सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों का अनुभव सुधर सकता है।

जैतपुर के आसपास से होकर कई पर्यटक महोबा, खजुराहो और झांसी जैसे पर्यटन स्थलों की यात्रा करते हैं। ऐसे में मस्तानी महल को बेहतर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी लाभ मिल सकता है।

पर्यटन अधिकारी डॉ. चित्रगुप्त श्रीवास्तव के अनुसार, महल का सर्वे पूरा हो चुका है और फिलहाल परियोजना का एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। बजट और संबंधित मंजूरियां मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। यानी महल को नया रूप देने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन पर्यटकों को नई सुविधाएं कब मिलेंगी, इसका इंतजार अभी बाकी है।

Location :  Mahoba

Published :  25 October 2026, 5:06 PM IST