
मार्केट में सजे हैं 2 से 40 फीट तक के रावण (Img: Dynamite News)
Kanpur: दशहरा आते ही शहर में त्योहार की रौनक बढ़ने लगी है। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण दहन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजारों में खरीदारी का माहौल है, तो गोल चौराहे के पास जीटी रोड स्थित रावण मंडी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। यहां सड़क के दोनों ओर छोटे-बड़े रावण के पुतले सजाए जा रहे हैं। कोई पुतले की सजावट में जुटा है, तो कोई उसे अंतिम रूप देने में लगा है।
रावण मंडी में इस बार अलग-अलग आकार के पुतले लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। बाजार में दो फीट के छोटे पुतलों से लेकर 30 से 40 फीट तक के बड़े रावण दिखाई दे रहे हैं। अपनी जरूरत और पसंद के हिसाब से लोग पुतले खरीदने पहुंच रहे हैं। छोटे पुतले बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं, जबकि बड़े पुतलों को लेकर भी ग्राहकों में उत्साह बना हुआ है।
दशहरे का पर्व नजदीक आते ही मंडी में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। शहर के अलग-अलग इलाकों के अलावा दूरदराज से भी लोग रावण के पुतले खरीदने आ रहे हैं। पुतलों की कीमत 500 रुपये से शुरू होकर 1500 रुपये तक बताई जा रही है। हालांकि, पुतले के आकार और अन्य बातों के हिसाब से कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
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ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक पुतले पसंद कर रहे हैं। त्योहार की तैयारियों के बीच दुकानदारों और कारीगरों को उम्मीद है कि दशहरे के करीब आने के साथ बिक्री में और तेजी आएगी।
रावण के पुतले तैयार करने वाले कारीगरों के लिए यह काम कुछ दिनों का नहीं, बल्कि महीनों की मेहनत का नतीजा है। कारीगरों के मुताबिक, पुतले बनाने की तैयारी काफी पहले शुरू हो जाती है। इसमें परिवार के सभी सदस्य मिलकर हाथ बंटाते हैं। कोई पुतले का ढांचा तैयार करता है, तो कोई उसकी सजावट और रंगीन कागज लगाने का काम संभालता है।
पुतले बनाने में बांस, रस्सी, लेई और सजावटी रंगीन कागज का इस्तेमाल किया जाता है। हर पुतले को तैयार करने में मेहनत और समय लगता है। कारीगरों का कहना है कि पहले की तुलना में लागत कुछ बढ़ी है। ऐसे में त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री उनके लिए काफी मायने रखती है।
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रावण के पुतले बनाना कारीगरों के लिए केवल परंपरा से जुड़ा काम नहीं, बल्कि रोजी-रोटी का अहम जरिया भी है। साल भर की मेहनत के बाद दशहरे के आसपास उन्हें बिक्री बढ़ने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि त्योहार नजदीक आते ही पुतलों को तैयार करने का काम और तेज हो जाता है।
फिलहाल कानपुर की रावण मंडी में छोटे-बड़े पुतलों की सजावट जारी है और ग्राहकों की आवाजाही भी बढ़ रही है। अब कारीगरों से लेकर खरीदारों तक, सभी की निगाहें विजयदशमी पर टिकी हैं। इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण का दहन किया जाएगा और इसी के साथ त्योहार का उत्साह अपने चरम पर पहुंचेगा।
Location : Kanpur
Published : 18 October 2026, 7:23 PM IST