JN Medical College: गेट पर गार्ड्स और अंदर हंगामा; जेएन मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

अलीगढ़ के एएमयू स्थित जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में तीमारदारों के हंगामे के बाद एक बार फिर माहौल गरमा गया। डॉक्टरों की सुरक्षा और बार-बार होने वाली हड़ताल के बीच क्या हैं अस्पताल के हालात, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 May 2026, 12:05 PM IST

Aligarh: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित एएमयू (AMU) के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में रविवार रात एक बार फिर डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच झड़प होते-होते बची। जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में यह कोई नई बात नहीं है। पिछले 11 महीनों में सुरक्षा और तीमारदारों की गुंडागर्दी के खिलाफ डॉक्टर 6 बार हड़ताल कर चुके हैं, लेकिन जमीन पर हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं।

गार्ड्स की लापरवाही और एक मरीज के साथ आने वाली 'तीमारदारों की फौज' के चलते यहाँ कभी भी बड़ा हिंसक रूप ले सकता है। आइए जानते हैं रविवार रात को ट्रॉमा सेंटर में क्या हुआ और क्यों यहाँ के रेजिडेंट डॉक्टर्स अपनी जान हथेली पर रखकर काम कर रहे हैं।

रविवार रात 8:40 बजे: ट्रॉमा सेंटर में जब थम गईं थीं सांसें

रविवार रात के करीब 8 बजकर 40 मिनट हो रहे थे। ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी में शहर के ही एक 56 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को लाया गया, जिनकी सांसें उखड़ रही थीं। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज को एक बार देखा और फिर वहीं पास में लेटे दूसरे गंभीर मरीज की तरफ बढ़ गए।

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बस इसी बात पर तमतमाए हुए आधा दर्जन (5-6) तीमारदार डॉक्टर पर चीखने-चिल्लाने लगे। उनका कहना था कि डॉक्टर दूसरे मरीज को छोड़कर सिर्फ उनके मरीज का ही इलाज करे। इमरजेंसी में अचानक हंगामा बढ़ने से डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। गनीमत रही कि दूसरे डॉक्टर ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और मरीज को अटेंड करते हुए परिजनों को शांत कराया, वरना एक बार फिर डॉक्टरों के साथ मारपीट और हड़ताल तय थी।

भगवान भरोसे जेएन मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा?

इस पूरे हंगामे के दौरान अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जो पोल खुली, वह हैरान करने वाली है:

  • कुर्सी से नहीं हिले गार्ड: ट्रॉमा सेंटर के मुख्य द्वार और अंदर के गेट पर गार्ड्स तैनात थे, लेकिन उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि अंदर कितने लोग घुस रहे हैं। जब हंगामा चरम पर पहुंचा, तो गार्ड कुछ देर के लिए खड़े हुए और फिर अपनी कुर्सियों पर जाकर बैठ गए।

  • 1 मरीज, 5 तीमारदार: नियम के मुताबिक एक मरीज के साथ केवल 2 तीमारदारों को अनुमति है। लेकिन रविवार रात इमरजेंसी में लेटे करीब 35 मरीजों में से हर एक के साथ 4 से 5 लोग खड़े थे।

  • खींचतान और डॉक्टरों की झल्लाहट: हर तीमारदार डॉक्टर का हाथ पकड़कर पहले अपने मरीज के पास खींच रहा था। 24 घंटे में करीब 1000 मरीजों का बोझ संभालने वाले डॉक्टर इस खींचतान में जब झल्लाकर तेज आवाज में बोलते हैं, तो वही विवाद की मुख्य वजह बन जाता है।

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पिछले 11 महीने से थम नहीं रहा विवाद

जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स अपनी सुरक्षा और तीमारदारों की बदसलूकी के खिलाफ पिछले करीब एक साल से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ग्राउंड जीरो पर हालात यह हैं कि पिछले 11 महीनों से हर कुछ दिन में कोई न कोई नया विवाद खड़ा हो जाता है, जिसके बाद डॉक्टरों को मजबूरन काम बंद करना पड़ता है।

जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में बार-बार होने वाले इन विवादों के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण सामने आते हैं। पहला, तीमारदारों या बाहरी तत्वों द्वारा डॉक्टरों के साथ की जाने वाली अभद्रता; दूसरा, परिसर में पुख्ता पुलिस चौकी और सुरक्षा व्यवस्था की भारी कमी; और तीसरा, मेडिकल कॉलेज प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (RDA) के बीच तालमेल का अभाव।

Location :  Aligarh

Published :  18 May 2026, 12:05 PM IST