यूपी में बच्चों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, DM और मुख्य सचिव को एक महीने में रिपोर्ट देने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों को स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने और एक माह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 22 September 2026, 10:26 AM IST

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने प्रदेश में स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों (DSVSC) की नियमित बैठकें कराने और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों (STSC) के कामकाज की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है। अदालत ने इस मामले में CBSE और ICSE को भी पक्षकार बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है।

एक महीने में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

न्यायालय ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि धारा 222G के तहत गठित विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों का विधिवत गठन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि ये समितियां नियमों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें।

मुख्य सचिव को अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करने होंगे। वहीं, जिलाधिकारियों को एक महीने के भीतर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

जनहित याचिका पर आया फैसला

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

याचिका में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और स्कूली वाहनों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी भी अदालत में उपस्थित हुए थे।

स्कूल वाहनों के लिए परमिट जरूरी

सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन (26वां संशोधन) नियम, 2019 के प्रावधानों की जानकारी अदालत को दी।

उन्होंने बताया कि नियम 222A के तहत स्कूल वाहनों के लिए परमिट अनिवार्य है। इसमें शिक्षण संस्थानों और निजी बसों के लिए अलग-अलग प्रावधान तय किए गए हैं।

वहीं, नियम 222E के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को स्कूल वाहनों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने पर जोर

अदालत को बताया गया कि नियम 222G के तहत विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में कई स्थानों पर ये समितियां सक्रिय नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने इसी स्थिति को देखते हुए समितियों के गठन और नियमित निगरानी पर जोर दिया है, ताकि स्कूल वाहनों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।

Location :  Lucknow

Published :  22 September 2026, 10:26 AM IST