गोरखपुर के बड़हलगंज में आगामी डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती की तैयारियों के बीच उपजा एक विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय प्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली और प्रशासन के कथित हस्तक्षेप के बाद बहुजन समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।

गोरखपुर बाबा साहब बैनर विवाद ( Source: Dynamite News)
Gorakhpur: डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती से पहले बड़हलगंज कस्बे में बाबा साहब के बैनर हटाने और फाड़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर बहुजन समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। मामले में कोतवाली बड़हलगंज में प्रार्थना पत्र देकर दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. अंबेडकर चौराहा बड़हलगंज पर पिछले 26 वर्षों से लगातार बाबा साहब की विशाल जयंती का आयोजन किया जाता रहा है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी 14 अप्रैल को प्रस्तावित जयंती समारोह की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। आयोजन के क्रम में पटना चौराहे पर बाबा साहब की जयंती के दो बैनर लगाए गए थे।
आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष प्रीति उमर के संरक्षण में चेयरमैन प्रतिनिधि द्वारा इन बैनरों को हटवाने का दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें यह तक कहा गया कि यदि बैनर नहीं हटाए गए तो जेसीबी मशीन से फाड़ दिया जाएगा। इस कथित धमकी के बाद विवाद से बचने के लिए संबंधित लोगों ने स्वयं ही पटना चौराहे से दोनों बैनर हटा दिए।
इसके बावजूद मामला यहीं शांत नहीं हुआ। आरोप है कि आज 30 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे बड़हलगंज सब्जी मंडी के पास एक पेड़ पर लगाए गए बाबा साहब के बैनर को जबरन फड़वा दिया गया। शिकायत में कहा गया है कि इस कार्रवाई में अधिशासी अधिकारी को मोहरा बनाकर कर्मचारियों पर दबाव डाला गया और बैनर को हटवाया गया।
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इतना ही नहीं, प्रार्थना पत्र में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि बिना 500 रुपये की रसीद कटवाए कोई भी बैनर न लगाने की धमकी दी गई। इस कथित रवैये को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बहुजन समाज के लोगों का कहना है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर किसी एक वर्ग या समुदाय के नहीं, बल्कि पूरे समाज के प्रेरणास्रोत और संविधान निर्माता हैं। ऐसे में उनके सम्मान से जुड़े बैनर को इस प्रकार हटाना सिर्फ एक पोस्टर हटाने का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
शिकायतकर्ताओं ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि शासन स्तर से 14 अप्रैल से पहले बाबा साहब की प्रतिमाओं के आसपास बाउंड्रीवाल, छतरी, टाइल्स और मार्बल आदि से सौंदर्गीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे समय में बाबा साहब के सम्मान में लगाए गए बैनर को हटाने की कार्रवाई को लोगों ने विरोधाभासी और अपमानजनक बताया है।
इस घटना के बाद बहुजन समाज के लोगों में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो समाज के लोग बाबा साहब के सम्मान में आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होंगे।
स्थानीय स्तर पर यह मामला अब सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है। लोगों की निगाहें अब पुलिस प्रशासन और नगर पंचायत प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।