देवरिया में हरियाली पर संकट : वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल, ठेकेदारों के हौसले बुलंद

देवरिया जिले में वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान को बढ़ावा देने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सिसई गांव समेत ग्रामीण क्षेत्रों में बिना परमिट हरे और फलदार पेड़ों की अवैध कटाई के आरोप सामने आ रहे हैं।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 17 June 2026, 5:42 AM IST

Deoria : एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। जनपद में वन विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में हरे-भरे और फलदार पेड़ों की अवैध कटाई बेखौफ तरीके से जारी है और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर रही है।

अवैध पेड़ कटान से बढ़ी चिंता

पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान को लेकर चल रही सरकारी मुहिम के बीच अवैध पेड़ कटान का मामला लगातार चर्चा में है। जहां एक ओर परिवहन मंत्री और जिला प्रभारी दयाशंकर सिंह के नेतृत्व में पर्यावरण को बढ़ावा देने और एक वृक्ष दस पुत्र समान जैसे संदेशों को धरातल पर उतारने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में हरे पेड़ों की कटाई लगातार सामने आ रही है।

सिसई गांव में बिना परमिट कटान का आरोप

भटनी थाना क्षेत्र के सिसई ग्राम सभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना किसी वैध अनुमति के फलदार और कीमती पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार बेखौफ होकर पेड़ों पर आरी चला रहे हैं और वन विभाग तथा स्थानीय पुलिस पूरी तरह मौन बनी हुई है।

कागजों में अभियान, जमीन पर कटते पेड़

एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चला रही है। वहीं दूसरी तरफ पुराने और छायादार पेड़ों की कटाई पर्यावरण संरक्षण के दावों को कमजोर कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर लकड़ी का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है और कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार देवरिया में पहले भी अवैध पेड़ कटान और ठेकेदारों से जुड़े विवाद सामने आ चुके हैं। कई मामलों में वन विभाग और ठेकेदारों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

पर्यावरण प्रेमियों की चेतावनी

पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी और उच्च वन अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटान पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र का हरित आवरण तेजी से घट सकता है और पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है।

सिस्टम पर बड़ा सवाल

अब बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार हरियाली बचाने के लिए अभियान चला रही है तो जमीनी स्तर पर पेड़ों की सुरक्षा किसके भरोसे है। क्या जिम्मेदार विभाग केवल दावों तक सीमित रहेंगे या फिर अवैध कटान पर सख्त कार्रवाई होगी। यह आने वाला समय तय करेगा।

Location :  Deoria

Published :  17 June 2026, 5:08 AM IST