बरेली बार की करोड़ों की जमीन पर विवाद! नए चैंबर के नाम पर 10-10 लाख वसूली के आरोप, जांच की मांग

बरेली बार एसोसिएशन की करोड़ों रुपये की जमीन और नए चैंबर आवंटन को लेकर विवाद बढ़ गया है। अधिवक्ता अंगन सिंह ने 10-10 लाख रुपये वसूली और फंड से कथित अवैध निकासी के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच, वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और जनरल हाउस की बैठक बुलाने की मांग की है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 October 2026, 2:22 PM IST

Bareilly: उत्तर प्रदेश के बरेली में बार एसोसिएशन की जमीन और नए अधिवक्ता चैंबरों के आवंटन को लेकर विवाद गहरा गया है। बार की करोड़ों रुपये की जमीन के कथित निजी सौदों और चैंबर आवंटित कराने के नाम पर 10-10 लाख रुपये एडवांस वसूलने के आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ता अंगन सिंह ने बार एसोसिएशन के शीर्ष नेतृत्व, अध्यक्ष और सचिव पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने बार की जनरल हाउस बैठक बुलाकर जमीन और चैंबर आवंटन से जुड़े फैसलों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है।

बार की जमीन के कथित निजी सौदे का आरोप

अधिवक्ता अंगन सिंह का आरोप है कि डाकघर के सामने स्थित बार एसोसिएशन की करोड़ों रुपये की जमीन का गुपचुप तरीके से सौदा किया गया है। उनका दावा है कि नए चैंबर दिलाने के नाम पर जूनियर अधिवक्ताओं, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और गैर-अधिवक्ताओं से कथित तौर पर 10-10 लाख रुपये एडवांस के रूप में लिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जमीन और चैंबर आवंटन की प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। आरोप है कि बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के अचानक जमीन की नाप-जोख और वहां गड्ढे खोदने का काम शुरू किया गया, जिससे अधिवक्ताओं के बीच नाराजगी बढ़ गई।

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बार एसोसिएशन के फंड से निकासी पर भी उठे सवाल

अधिवक्ता अंगन सिंह ने बार एसोसिएशन के फंड से बीते वर्षों में लाखों रुपये की कथित अवैध निकासी का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि जमीन और चैंबर आवंटन के विवाद की निष्पक्ष जांच के साथ संस्था के वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल होनी चाहिए। इस प्रकरण में पांच प्रमुख बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। इनमें बाबू पोशाकी लाल द्वारा दान की गई जमीन के मूल मालिकाना हक और दान से जुड़ी शर्तों की स्थिति शामिल है। इसके अलावा, आरोप है कि जमीन और निर्माण से जुड़े फैसलों में जनरल हाउस तथा मैनेजमेंट कमेटी की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

चैंबर आवंटन की प्रक्रिया पर पारदर्शिता की मांग

विवाद का एक अहम पहलू यह है कि नए चैंबर किन लोगों को और किन मानकों के आधार पर आवंटित किए जा रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार की संपत्ति और चैंबर आवंटन से जुड़े निर्णय पारदर्शी होने चाहिए, ताकि पात्र अधिवक्ताओं के हित प्रभावित न हों। आरोपों के मुताबिक, यदि बाहरी लोगों से भी चैंबर दिलाने के नाम पर रकम ली गई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भुगतान किस आधार पर लिया गया और उसका हिसाब संस्था के रिकॉर्ड में कैसे दर्ज है। इस संबंध में संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई है।

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जनरल हाउस की बैठक बुलाने और आवंटन रोकने की मांग

मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने बार कार्यकारिणी से तत्काल जनरल हाउस की बैठक बुलाने की मांग की है। इसके साथ ही विवादित चैंबर आवंटन प्रक्रिया पर जांच पूरी होने तक रोक लगाने और कथित तौर पर लिए गए धन का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार की जमीन संस्था की संपत्ति है और इससे जुड़े फैसले पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होने चाहिए। अब इस मामले में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का पक्ष, जमीन से संबंधित दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। आरोपों की जांच के बाद ही कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Location :  Bareilly

Published :  18 October 2026, 2:22 PM IST