रेंगते हुए मंत्री आवास पहुंचे अभ्यर्थी, लखनऊ में फूटा प्रदर्शनकारियों का गुस्सा

लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। नियुक्ति और आरक्षण विसंगतियों को लेकर नाराज युवाओं ने अनोखा प्रदर्शन करते हुए मंत्री आवास की तरफ रेंगकर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 May 2026, 1:19 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बार फिर 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। लंबे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे युवाओं ने इस बार विरोध का बेहद भावुक और अनोखा तरीका अपनाया। प्रदर्शनकारी बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास की तरफ सड़कों पर रेंगते हुए बढ़े। भीषण गर्मी और तपती सड़क पर युवाओं को इस तरह रेंगते देख हर कोई हैरान रह गया।

प्रदर्शन के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके चलते काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। युवाओं का आरोप है कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें लगातार टाला जा रहा है।

Lucknow Power Cut: लखनऊ के चिनहट में बिजली संकट, पानी को तरसे लोग, कौन जिम्मेदार?

क्या है 69000 शिक्षक भर्ती विवाद

यह पूरा मामला साल 2019 में उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में निकली 69000 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा हुआ है। शुरुआत में यह भर्ती एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया की तरह दिखाई दी, लेकिन परिणाम जारी होने के बाद विवाद शुरू हो गया।

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि आरक्षित वर्ग की सीटों पर दूसरे उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का हक प्रभावित हुआ।

इसके अलावा भर्ती में तय किए गए कट-ऑफ अंकों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कट-ऑफ निर्धारण में भी गड़बड़ी हुई, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा उलझा दिया।

कोर्ट-कचहरी में उलझी भर्ती प्रक्रिया

आरक्षण और कट-ऑफ विवाद के चलते यह भर्ती प्रक्रिया कई सालों से अदालतों में फंसी हुई है। मामला कभी हाई कोर्ट पहुंचा तो कभी सुप्रीम कोर्ट तक गया। इस दौरान अदालतों की तरफ से कई आदेश और टिप्पणियां भी सामने आईं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

परीक्षा पास करने के बावजूद हजारों अभ्यर्थी आज भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे अहम साल कोर्ट की तारीखों और आंदोलन में गुजार दिए। कई युवाओं का आरोप है कि नौकरी की उम्मीद में उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

Lucknow: अवैध खनन बना मौत की वजह, दोस्तों संग तालाब में नहाने गए बालक की मौत

आर-पार की लड़ाई के मूड में युवा

लखनऊ में हुए इस प्रदर्शन से साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब देने लगा है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक सरकार आरक्षण विसंगतियों को दूर कर नियुक्ति पत्र नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

युवाओं का कहना है कि रेंगकर प्रदर्शन करने का मकसद सरकार को यह दिखाना था कि एक नौकरी के लिए प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा किस हद तक मजबूर हो चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस तीखे विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग इस विवादित भर्ती प्रक्रिया का कोई समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।

Location :  Lucknow

Published :  18 May 2026, 1:19 PM IST