अगर AI का स्विच बाहर हुआ तो यूरोप ठप पड़ सकता है, लेगार्ड बोले-यूरोप सिर्फ विदेशी AI तकनीक खरीदने वाला बाजार नहीं बने

यूरोप जिस AI तकनीक पर तेजी से निर्भर हो रहा है, वही आने वाले समय में उसके लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। ECB प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने विदेशी AI और डेटा सेंटर पर निर्भरता को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 September 2026, 11:31 AM IST

New Delhi: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं है। बैंकिंग, स्वास्थ्य, कारोबार, सुरक्षा और सरकारी सेवाओं से लेकर रोजमर्रा के कई कामों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने यूरोप को लेकर ऐसी चेतावनी दी है, जिसने AI और वैश्विक ताकतों के बीच बढ़ती निर्भरता पर नई बहस छेड़ दी है।

वियना में दिए अपने भाषण में लेगार्ड ने कहा कि यूरोप की विदेशी AI तकनीक पर निर्भरता आगे चलकर बड़ा जोखिम बन सकती है। खासकर अमेरिका में विकसित AI मॉडल और तकनीकी ढांचे पर यूरोप की निर्भरता को उन्होंने गंभीर मुद्दा बताया। उनके मुताबिक अगर किसी वजह से इन तकनीकों तक यूरोप की पहुंच अचानक सीमित हो जाती है, तो इसका असर एक-दो क्षेत्रों तक नहीं रहेगा, बल्कि कई सेक्टर एक साथ प्रभावित हो सकते हैं।

डेटा सेंटर की कमी भी बड़ी परेशानी

लेगार्ड की चिंता सिर्फ AI मॉडल तक सीमित नहीं है। यूरोप के सामने अपनी कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा सेंटर तैयार करने की चुनौती भी है। दुनिया में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ रही है, लेकिन यूरोप इस मामले में अमेरिका से काफी पीछे है।

यूरोपियन यूनियन के एक दस्तावेज में भी कहा गया है कि डेटा सेंटर की सीमित क्षमता के कारण यूरोपीय कंपनियों को महत्वपूर्ण डिजिटल कामों के लिए विदेशी कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे बाहरी कंपनियों या देशों के फैसलों का असर यूरोप के डिजिटल कामकाज पर पड़ सकता है।

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सिर्फ तकनीक नहीं, आर्थिक दबाव का भी डर

लेगार्ड ने AI की इस निर्भरता को आर्थिक नजरिए से भी देखा है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही हैं और इसके लिए बड़े पैमाने पर कर्ज भी ले रही हैं। इसका असर यूरोप के बॉन्ड बाजार और ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

दूसरी तरफ यूरोप के पेंशन फंड और निवेशक अमेरिकी टेक कंपनियों में बड़ी रकम लगाए हुए हैं। ऐसे में अगर अमेरिकी टेक बाजार में बड़ी गिरावट आती है तो उसका असर यूरोप के निवेशकों और आम लोगों की बचत तक पहुंच सकता है। यानी AI की दौड़ का फायदा और जोखिम दोनों सीमाओं से बाहर जा चुके हैं।

यूरोप को अपना AI तैयार करने की सलाह

लेगार्ड का कहना है कि यूरोप को सिर्फ विदेशी AI तकनीक खरीदने वाला बाजार बनने के बजाय अपनी क्षमता तैयार करनी होगी। इसके लिए डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग पावर और ऐसे AI मॉडल विकसित करने होंगे जिन्हें यूरोपीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलाया जा सके।

उनके मुताबिक AI को तेजी से अपनाने से यूरोप की उत्पादकता अगले एक दशक में 4 फीसदी तक बढ़ सकती है। इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ सरकारों की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हो सकता है।

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AI की रफ्तार पर अमेरिका में भी छिड़ी बहस

इसी बीच अमेरिका में AI को लेकर बहस का दूसरा पहलू सामने आया है। Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने AI मॉडल के विकास की रफ्तार को कुछ समय के लिए नियंत्रित करने की अपील की है। उनका कहना है कि AI की क्षमता जिस तेजी से बढ़ रही है, सुरक्षा उपाय उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उनकी अपील को OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क समेत कई बड़े टेक नेताओं का समर्थन मिला है।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी AI सुरक्षा और नियमन को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई है। उनका रुख इस बहस को राजनीतिक रंग भी दे रहा है। सवाल यह है कि AI को तेजी से आगे बढ़ाया जाए या पहले उसके जोखिमों से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए।

ट्रंप का रुख बिल्कुल अलग

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप AI की रफ्तार कम करने के पक्ष में नहीं दिखते। उनका तर्क है कि अगर अमेरिका ने AI विकास में कदम पीछे खींचे तो चीन आगे निकल सकता है। ऐसे में AI अब केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा का अहम हथियार भी बन चुका है।

यही वजह है कि यूरोप की चिंता और अमेरिका की AI रणनीति एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई दे रही हैं। एक तरफ AI को लेकर दुनिया में रफ्तार बढ़ाने की होड़ है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी बड़ा होता जा रहा है कि अगर तकनीक पर नियंत्रण किसी दूसरे देश या कंपनी के हाथ में रहा तो भविष्य में उसकी कीमत कौन चुकाएगा।

Location :  New Delhi

Published :  15 September 2026, 11:31 AM IST