
नई दिल्ली: गुरु पूर्णिमा का दिन गुरुओं को समर्पित होता है। इस दिन विशेष तौर से गुरुओं की पूजा की जाती है। भारतीय संस्कृति में गुरुओं को ब्रह्माण्ड के प्रमुख देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्यनीय माना गया हैं।
गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास को तीनों काल का ज्ञाता माना जाता है। महर्षि व्यास ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बांटकर उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अर्थवेद रखा था।
उनके मान-सम्मान के लिए आषाढ़ शुक्ल की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती हैं। भारत भर में इस दिन अधिकांश जगह लोग महर्षि वेदव्यास के चित्र की पूजा करते हैं। गुरु पूर्णिमा को कई जगह भव्य महोत्सव के रूप में मनाते हुए ब्रह्मलीन गुरुओं की समाधि का पूजन अर्चन भी करते हैं।
Published : 16 July 2019, 10:09 AM IST
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