
गुरुग्राम: साइबर ठगों के साथ जानी मानी टेलीकॉम कंपनी की मिलीभगत का गुरूग्राम की साइबर क्राइम टीम और केंद्रीय ग्रह मंत्रालय से संबंधित इंडियन साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर ने मिलकर इस क्राइम को बेनकाब किया।
कैसे आया मामला सुर्खियों में
कछ दिन पहले साइबर थाना में दी अपनी शिकायत में एक व्यक्ति ने बताया, की उनके पास गुरूग्राम के लैंडलाइन के नंबर से एक कॉल आया है। जिसमें उसे पार्ट टाइम जॉब देने की बात कही गई।
इस जॉब में उसे अलग-अलग होटल के रिव्यू डालने थे। एक टास्क को पूरा करते ही उसके बैंक खाते में 200 रूपय ट्रांसफर हुए। फिर उसे टेलिग्राम ग्रुप में एड किया गया।
दो तीन टास्क देते हुए छोटे-छोटे अमाउंट उसके खाते में ट्रांसफ़र कराए गए। उसके बाद उससे आगे के टास्क के लिए इंवेस्टमेंट करने के नाम पर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए गए। जब पीड़ित ने पैसे निकालने की बात कही तो और पैसों की मांग की। पैसे ना देने पर उसे ग्रुप से बाहर कर दिया।
कैसे किया पुलिस ने किया जुर्म का पर्दाफाश
शिकायत मिलते ही पुलिस एक्टिव हुई उसने साइबर क्राइम पुलिस के और इंडियन साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर के साथ मिलकर मामले की छानबीन शुरु की। तफ्तीश के दौरान पता चला कि ठगों को वर्चुअल नंबर टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारी की मदद से मिलता था।
इसके बाद आरोपियों की पहचान शुरू की गई, जिसमें दो लोगों हेमंत और नीरज के नाम सामने आए। पहचान करने पर दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई, आरोपों की पुष्टी होने पर दोनों को अरेस्ट कर लिया गया।
कैसे साबित हुआ आरोप
पूछताछ में पता चला कि वारदात में इस्तेमाल किए गए नंबर एकमदर्श सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के नाम से जारी किए गए थे। जांच में पुलिस ने पाया की ऐसी कोई कंपनी है ही नहीं।
आरोपियों ने TRAI के नियमों का उल्लंघन करते हुए कंपनी के नाम से लैंडलाइन नंबर दिए थे। आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि फेक पते पर रजिस्टर्ड कंपनी के ऑप्रेशनल मेनेजर के साथ मिल कर लैंडलाइन और डीआईडी नंबर किए थे। इसके अलावा और भी नंबर इंडोनेशियन व्यक्ति को उप्लब्ध कराए थे।
कैसे देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कंपनी के दो कर्मचारी पार्ट टाइम जॉब दिलवाने और इंवेस्टमेंट के नाम पर व्हाट्सएप व टेलीग्राम के जरिए फ्रॉड करने वाले इंडोनेशियन और चाइनीज ठगों को वर्चुअल नंबर उपलब्ध कराते थे। आरोपी नीरज के पास कंपनी में साइट वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी थी और हेमंत के पास साइट वेरिफिकेशन करने वाली टीम पर नज़र रखने की जिम्मेदारी थी।
मिल रहे थे हर महीने 8 से 10 लाख रूपय
इस मामले की छान-बीन के दौरान पुलिस को दोनों आरोपी हेमंत और नीरज के पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद हुए है। कंपनी के नंबरो की हेराफारी के बदले में हर महीने आठ से दस लाख रूपय कमा रहे थे दोनों आरोपी।
पुलिस ने दी यह जानकारी
सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम) प्रियांशू रावत ने बताया कि दोनों आरोपीयों द्वारा बनाए गए सोशल मीडिया ग्रुप में और भी कई सारे क्लाउड वेस्ट कनेक्शन उपलब्ध कराए गए थे। शुरूआती जांच में पता चला कि दोनों के पास करीब 500 से ज्यादा कनेक्शन मिल चुके है। अभी आरोपियों को एक दिन की रिमांड पर भेजा गया है।
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Published : 10 January 2025, 8:31 PM IST
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