
नई दिल्लीः ईद उल फितर मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार है, जो रमजान के महीने के पूरा होने पर मनाया जाता है। ईद उल फितर के साथ ही रोजे खत्म हो जाते हैं। जिसे चांद रात मुबारक के बाद मनाया जाता है।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान के बाद 10वें शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है। ईद का त्योहार हमेशा से ही चांद पर निर्भर करता है। चांद देखने के बाद ही ये पर्व मनाया जाता है। अगर 12 मई की रात चांद दिखा तो ईद का त्योहार 13 मई को मनाया जाएगा। अगर 13 मई को चांद दिखता है तो ईद 14 मई को मनाई जाएगी।
इस दिन मीठे पकवान जैसे कि सेंवई, मिठाई जैसे पकवान बनते हैं। मीठी सेंवई घर आए मेहमानों को खिलाई जाती है। दोस्तों और रिश्तेदारों में ईदी बांटी जाती है। लोग एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। हालांकि कोरोना के चलते इस बार ईद का पर्व धूमधाम से नहीं मनाया जा सकेगा। ईद उल फितर को दान का पर्व कहा जाता है। इस साल भी कोरोना के कारण ईद का त्योहार मनाने के लिए कुछ हिदायतें दी गई हैं।
दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी और फतेहपुरी के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरों के मद्देनजर लोगों से ईद की नमाज घर पर ही अदा करने की अपील की।
दोनों शाही इमामों ने सोमवार को अलग-अलग वीडियो जारी कर मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए ईद की नमाज़ घर में ही पढ़ें।
Published : 11 May 2021, 9:44 AM IST
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