Deepti Jeevanji Gold: कभी उड़ाया जाता था मजाक, आज भारत को गोल्ड दिलाकर दुनिया में चमकीं दीप्ति जीवांजी

Deepti Jeevanji Gold Medal: तेलंगाना की पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने 2026 एशियन पैरा गेम्स में 400 मीटर टी20 रेस 56.36 सेकंड में पूरी कर गोल्ड जीता। जानिए उनके संघर्ष, बचपन, विश्व रिकॉर्ड और पैरालंपिक पदक तक पहुंचने की पूरी कहानी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 October 2026, 12:03 PM IST

New Delhi: भारत की पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने 2026 एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। जापान के नागोया में महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में उन्होंने 56.36 सेकंड में रेस पूरी की और गेम्स रिकॉर्ड बनाया।

उनकी इस कामयाबी ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। कभी जिनकी प्रतिभा और व्यक्तित्व को लेकर लोग मजाक उड़ाते थे, आज वही खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन कर रही हैं।

तेलंगाना के छोटे से गांव में हुआ जन्म

दीप्ति जीवांजी का जन्म 27 सितंबर 2003 को तेलंगाना के वारंगल जिले के कलेड़ा गांव में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। माता-पिता खेती और खेतों में मजदूरी करके परिवार चलाते थे।

बचपन से ही दीप्ति को दौड़ने का शौक था और उनकी रफ्तार दूसरे बच्चों से अलग नजर आती थी। गांव के स्कूल में शारीरिक शिक्षा शिक्षक बियानी वेंकटेश्वरालु ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें दौड़ का नियमित अभ्यास कराना शुरू किया।

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कोच ने पहचानी प्रतिभा, बदली जिंदगी

साल 2019 में राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच एन रमेश की नजर दीप्ति पर पड़ी। उन्होंने उनकी क्षमता को पहचाना और परिवार को हैदराबाद में प्रशिक्षण दिलाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इसके बाद दीप्ति को बेहतर प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर मिले। शुरुआती मुश्किलों के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और धीरे-धीरे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

बौद्धिक दिव्यांगता के बावजूद खेल में बनाई पहचान

दीप्ति बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों की टी20 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करती हैं। इस श्रेणी में खिलाड़ियों की पात्रता निर्धारित मानकों के अनुसार तय की जाती है। उनके बचपन में कुछ लोगों ने उनके व्यवहार और व्यक्तित्व को लेकर मजाक उड़ाया था।

हालांकि, परिवार और प्रशिक्षकों के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। उन्होंने अपनी उपलब्धियों से साबित किया कि सही मार्गदर्शन, अवसर और निरंतर अभ्यास से खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

विश्व रिकॉर्ड से पैरालंपिक पदक तक का सफर

दीप्ति ने 2023 में हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में 400 मीटर टी20 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने 56.69 सेकंड के समय के साथ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। साल 2024 में कोबे में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 55.07 सेकंड का समय निकालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद पेरिस पैरालंपिक 2024 में उन्होंने 55.82 सेकंड में रेस पूरी करके कांस्य पदक हासिल किया।

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नागोया में फिर लहराया तिरंगा

2026 एशियन पैरा गेम्स में दीप्ति ने 56.36 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। जापान की नीना कानो ने 58.92 सेकंड में रेस पूरी करके रजत, जबकि अकाने काटो ने 1 मिनट 0.26 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इस जीत के साथ दीप्ति ने एशियन पैरा गेम्स में अपना दूसरा स्वर्ण पदक दर्ज कराया। उनका सफर संघर्ष, परिवार के सहयोग और खेल के प्रति समर्पण की मिसाल है।

Location :  New Delhi

Published :  20 October 2026, 12:03 PM IST