
घर में खिड़कियों का वास्तु महत्व (Img- Internet)
New Delhi: वास्तु शास्त्र में घर की खिड़कियों को केवल रोशनी और हवा आने का साधन नहीं माना जाता, बल्कि इन्हें सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाता है। सही दिशा में, विशेषकर पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व में बड़ी खिड़कियां घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति लाती हैं।
खिड़कियों की संख्या सम होनी चाहिए और वे साफ-सुथरी एवं बिना दरार वाली होनी चाहिए। सुबह के समय सूर्य की किरणें घर में प्रवेश कर ऊर्जा और विटामिन-D प्रदान करती हैं। वहीं गंदी या टूटी खिड़कियां नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए उनका ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है।
वास्तु के अनुसार पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में बड़ी खिड़कियां अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। ऐसी खिड़कियां घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य को बढ़ाती हैं। खिड़कियों की संख्या हमेशा सम (2, 4, 6 आदि) होनी चाहिए, जिससे ऊर्जा का संतुलन बना रहे।
खिड़कियों के शीशे हमेशा साफ और चमकदार होने चाहिए। गंदे या धुंधले शीशे सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोकते हैं। यदि किसी खिड़की का शीशा टूट जाए या उसमें दरार आ जाए, तो उसे तुरंत बदलना चाहिए क्योंकि यह नकारात्मक प्रभाव और आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।
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पूर्व दिशा की खिड़कियों को सुबह के समय कम से कम 20 से 30 मिनट तक जरूर खोलना चाहिए। इससे सूर्य की ऊर्जा, ताजगी और विटामिन-D घर के भीतर प्रवेश करता है, जिससे स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
वास्तु के अनुसार खिड़कियों की सही दिशा, सफाई और उपयोग घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है। यह न केवल ऊर्जा को संतुलित करता है बल्कि जीवन में सुख-शांति भी लाता है।
Location : New Delhi
Published : 2 May 2026, 4:27 PM IST