
भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन (Img- AI)
New Delhi: रक्षाबंधन भाई और बहन के अटूट और पवित्र प्रेम का सबसे बड़ा त्योहार है। इस विशेष अवसर पर बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा का धागा यानी राखी बांधती हैं और उनके सुखी व दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। वहीं, भाई भी जीवनभर बहन की रक्षा करने का वचन देता है और उन्हें सुंदर उपहार व दक्षिणा भेंट करता है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन मनाया जाता है। अक्सर इस त्योहार पर भद्रा का साया रहने से समय को लेकर उलझन बनी रहती है, जिससे राखी बांधने का समय सुबह की जगह शाम या रात का हो जाता है। आइए जानते हैं कि इस साल रक्षाबंधन कब है, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है और भद्रा का समय क्या रहेगा।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल श्रावण पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, त्योहारों में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है।
चूंकि सावन पूर्णिमा की उदयातिथि 28 अगस्त दिन शुक्रवार को पड़ रही है, इसलिए इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को ही धूमधाम से मनाया जाएगा। भले ही पूर्णिमा तिथि इस दिन सुबह समाप्त हो रही है, लेकिन उदयातिथि के नियम के अनुसार 28 अगस्त का पूरा दिन सावन पूर्णिमा के त्योहार के लिए ही मान्य माना जाएगा।
साल 2026 में रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी सजाने के लिए बहनों को कुल 3 घंटे और 51 मिनट का एक बेहद शुभ समय मिल रहा है। बहनें अपने भाइयों को सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट के बीच कभी भी राखी बांध सकती हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस शुभ अवधि के भीतर भी विशेष चौघड़िया मुहूर्त शामिल हैं, जो इस प्रकार हैं:
चर-सामान्य मुहूर्त: सुबह 05:57 बजे से सुबह 07:33 बजे तक।
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 07:33 बजे से सुबह 09:10 बजे तक।
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 09:10 बजे से सुबह 10:46 बजे तक (हालांकि पूर्णिमा तिथि 09:48 बजे समाप्त हो जाएगी, इसलिए 09:48 बजे तक राखी बांधना सबसे उत्तम रहेगा)।
अक्सर रक्षाबंधन के त्योहार का मजा भद्रा की वजह से किरकिरा हो जाता है, लेकिन इस साल बहनों के लिए बहुत अच्छी खबर है। इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पूरा दिन भद्रा के साए से पूरी तरह मुक्त रहेगा। दरअसल, भद्रा का साया 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के साथ ही सुबह 09 बजकर 08 मिनट से शुरू हो जाएगा, जो उसी रात 09 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।
इस दौरान भद्रा का वास पाताल और पृथ्वी लोक पर रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 27 अगस्त को दोपहर 01:35 बजे से रात 09:32 बजे तक पृथ्वी लोक की भद्रा रहेगी, इसलिए इस समय में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। 28 अगस्त की सुबह तक भद्रा समाप्त हो चुकी होगी, जिससे रक्षाबंधन का पर्व पूरी तरह दोषमुक्त रहेगा।
Location : New Delhi
Published : 2 July 2026, 2:16 PM IST