Makar Sankranti 2026: 23 साल बाद एकादशी का संयोग, क्या इस बार खिचड़ी खाना और दान करना रहेगा वर्जित?

Makar Sankranti 2026 में 23 साल बाद षटतिला एकादशी का संयोग बन रहा है। ऐसे में क्या इस बार खिचड़ी खाना और दान करना वर्जित रहेगा? जानें मकर संक्रांति की सही तिथि, एकादशी के नियम और इस दिन क्या दान करना शुभ माना जाता है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 8 January 2026, 3:06 PM IST

New Delhi: मकर संक्रांति सनातन धर्म के प्रमुख और अत्यंत पुण्यदायी पर्वों में से एक मानी जाती है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति मानी जाती है। देशभर में यह पर्व अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन खिचड़ी का सेवन और दान इसकी सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में शामिल है।

हालांकि, साल 2026 में मकर संक्रांति को लेकर श्रद्धालुओं के मन में असमंजस की स्थिति है। इसकी वजह है 23 वर्षों बाद बना एक दुर्लभ संयोग, जब मकर संक्रांति के दिन ही षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाना और उसका दान करना उचित होगा या नहीं।

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी की तिथि

साल 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसलिए इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। संयोग से इसी दिन भगवान विष्णु को समर्पित षटतिला एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह संयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाना होगा वर्जित?

धर्मशास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, एकादशी तिथि पर अन्न का सेवन करना, अन्न को छूना और अन्न का दान करना वर्जित माना गया है। विशेष रूप से चावल का सेवन एकादशी के दिन निषिद्ध बताया गया है। चूंकि खिचड़ी चावल से ही बनाई जाती है, इसलिए इस बार मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाना और उसका दान करना दोनों ही वर्जित माने गए हैं। पंडितों का कहना है कि एकादशी पर अन्न ग्रहण करने से व्रत का पुण्य क्षीण हो सकता है और धार्मिक नियमों का उल्लंघन होता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को इस दिन खिचड़ी से दूरी बनानी चाहिए।

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मकर संक्रांति पर क्या करें दान?

हालांकि खिचड़ी और चावल का दान इस बार वर्जित है, लेकिन मकर संक्रांति पर दान का महत्व कम नहीं होता। इस दिन तिल का विशेष महत्व बताया गया है। तिल को पाप नाशक और सूर्य देव को प्रिय माना जाता है।

मकर संक्रांति के दिन आप तिल का दान, गुड़ का दान, तिल से बने लड्डू, तिल की मिठाइयां, कंबल, वस्त्र और जरूरतमंदों को दक्षिणा दान कर सकते हैं। मान्यता है कि तिल दान से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

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कैसे करें पूजा और स्नान?

मकर संक्रांति के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। चूंकि यह दिन षटतिला एकादशी का भी है, इसलिए विष्णु सहस्त्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।

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Published : 
  • 8 January 2026, 3:06 PM IST