
Symbolic Photo (Image: Dynamite News)
धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं में छलनी से पति का चेहरा देखने की रस्म को दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। छलनी का इस्तेमाल चीजों को छानने के लिए किया जाता है। प्रतीकात्मक रूप से इसे जीवन की नकारात्मकता को दूर रखने और रिश्ते में अच्छाई बनाए रखने की कामना से भी जोड़ा जाता है।
व्रत पूरा करने के दौरान महिलाएं पहले छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा निहारती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस रस्म के तरीके और उससे जुड़ी मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा देखने को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने और उसके दर्शन के बाद पति का चेहरा देखने से व्रत की रस्म पूरी होती है। इसके पीछे पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना जुड़ी है।
कुछ लोग छलनी को चंद्रमा की रोशनी और पति के चेहरे के बीच एक प्रतीकात्मक माध्यम के रूप में भी देखते हैं। हालांकि, छलनी से चांद देखने की परंपरा के पीछे बताए जाने वाले अर्थ लोक मान्यताओं और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों पर आधारित हैं। इसे किसी एक निश्चित धार्मिक व्याख्या तक सीमित नहीं किया जा सकता।
Location : New Delhi
Published : 27 October 2026, 11:10 AM IST