चीखता रहा परिवार, पुलिस ने चुपचाप करा दिया अंतिम संस्कार! जानिए संगरूर के गुलजार सिंह आत्महत्या कांड का कड़वा सच

पंजाब के संगरूर में नशे का विरोध करने वाले गुलजार सिंह की आत्महत्या मामले में बड़ा मोड़। परिवार ने पुलिस पर धोखे से अंतिम संस्कार कराने का आरोप लगाया है। जानिए क्यों इंसाफ की आस में श्मशान में ही छोड़ दी गई हैं अस्थियां।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 September 2026, 12:20 PM IST

Sangrur: पंजाब के संगरूर जिले के तूरबंजारा गांव से एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे की पोल खोलकर रख दी है। गांव के ही एक साधारण नागरिक गुलजार सिंह ने जब अपने इलाके में खुलेआम बिक रहे नशे और अपने बेटे की बर्बादी के खिलाफ सत्ता के सामने आवाज उठाई, तो शायद उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।

अब इस आत्महत्या मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। पीड़ित परिवार ने पंजाब पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर धोखे और जबरदस्ती से अंतिम संस्कार करवाने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है।

पुलिस के धोखे और जबरन अंतिम संस्कार का कड़वा सच

मृतक गुलजार सिंह के बेटों लखविंदर सिंह, प्रभजोत सिंह, सहबाज सिंह और उनकी मां ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी लाचारी और गुस्सा जाहिर किया है। सहबाज सिंह का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने उनके साथ न्याय करने के बजाय उन्हें झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया और उनके पिता का जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया।

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परिवार का कहना है कि उन्हें रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम रस्में तक पूरी नहीं करने दी गईं। आहत होकर परिवार ने अब यह कड़ा रुख अपनाया है कि जब तक आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में नामित सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे श्मशान घाट से गुलजार सिंह की अस्थियां नहीं उठाएंगे और न ही उनकी आत्मिक शांति का भोग डालेंगे।

सार्वजनिक मंच पर सच बोलने की मिली ऐसी सजा

मामले की शुरुआत 6 सितंबर को हुई, जब गांव में आयोजित एक विकास कार्यक्रम में पंजाब के वित्त मंत्री और स्थानीय विधायक हरपाल सिंह चीमा मौजूद थे। गुलजार सिंह ने भरी सभा में मंत्री के सामने गांव में बिक रहे चिट्टे (नशे) और उससे तबाह हो रही युवा पीढ़ी का मुद्दा बेबाकी से उठाया। आरोप है कि इसके बाद पंचायत से जुड़े कुछ रसूखदार लोगों ने गुलजार सिंह पर बेतहाशा दबाव बनाया, उन्हें जातिसूचक गालियां दीं और पंचायत के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर मजबूर किया।

इस भयानक अपमान और मानसिक दबाव को गुलजार सिंह सहन नहीं कर सके और 7 सितंबर को उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। कई अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

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विपक्ष का तीखा हमला और नेशनल एससी कमीशन की एंट्री

इस दुखद घटना ने अब पूरे पंजाब में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। 8 सितंबर को दर्ज एफआईआर (BNS की धारा 108 और SC/ST एक्ट) में भले ही गांव के सरपंच समेत पांच लोगों को नामजद कर चार को गिरफ्तार कर लिया गया हो, लेकिन वित्त मंत्री का नाम न होने पर सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को आड़े हाथों लिया है और नशे के मुद्दे पर वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन किशोर मकवाना ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर मामले की विस्तृत जांच की बात कही है।

Location :  Sangrur

Published :  10 September 2026, 12:20 PM IST